Bilkul Sateek News
Reporter: Sonu Rana
Author: Sonu Rana
नई दिल्ली: दिल्ली में एक बार फिर टिल्लू ताजपुरिया और जितेंद्र गोगी गैंग के बीच पुरानी रंजिश ने अपना रंग दिखाया है। दोनों गैंग के सरगना जितेंद्र गोगी और सुनील उर्फ टिल्लू ताजपुरिया अब इस दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनके गुर्गे अभी भी एक-दूसरे का खून बहाने से बाज नहीं आ रहे हैं।
पुलिस के अनुसार, दोनों गैंग के लीडरों की हत्या के बाद भी उनकी राइवलरी खत्म नहीं हुई। गोगी की रोहिणी कोर्ट परिसर में हत्या के बाद टिल्लू ताजपुरिया को तिहाड़ जेल के अंदर ही गोगी गैंग के सदस्यों ने मार डाला था। लेकिन बदले की यह जंग अब उनके गुर्गों ने संभाल ली है। हाल ही में बवाना विधानसभा क्षेत्र के हरेवली गांव में रवि भारद्वाज की हत्या को भी टिल्लू ताजपुरिया गैंग का काम माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि रवि गोगी गैंग का करीबी था, जिसकी वजह से उसे निशाना बनाया गया। सूत्रों की माने तो पुलिस ने इस मामले में टिल्लू गैंग के गुर्गों को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस सूत्रों की माने तो सरगनाओं के मारे जाने के बाद दोनों गैंगों में नई लीडरशिप उभरी है और गुर्गे अब भी पुरानी दुश्मनी निभा रहे हैं। तिहाड़ जेल के अंदर भी दोनों गुटों के सदस्यों के बीच झड़पें होती रहती हैं। इसी तरह रोहिणी और दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में भी दोनों गुटों के बीच गोलीबारी की घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं। दिल्ली पुलिस का कहना होता है कि गैंगों पर नजर रखी जा रही है। बावजूद इसके हरियाणा के आसपास के गांवों में गैंगवार की खबरें आती रहती हैं।

कभी थे दोस्त, फिर बन गए जानी दुश्मन, दोनों का हुआ खूनी अंत
टिल्लू ताजपुरिया और जितेंद्र गोगी कभी काफी करीबी दोस्त हुआ करते थे। बाद में दोस्ती दुश्मनी में बदली और फिर अंत में दोनों की दर्दनाक मौत हुई। लेकिन आज भी उनके गुर्गे एक-दूसरे का खून बहाने से बाज नहीं आ रहे हैं। टिल्लू ताजपुरिया और जितेंद्र गोगी अलीपुर इलाके के रहने वाले थे। स्कूल के दिनों में दोनों अच्छे दोस्त थे। रंजिश की शुरुआत वर्ष 2010 में अलीपुर के ही स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज के छात्र संघ चुनाव से हुई। दोनों चुनाव में अलग-अलग उम्मीदवारों को सपोर्ट कर रहे थे। इसी दौरान छोटी-मोटी बातों पर विवाद बढ़ा। एक-दूसरे के समर्थकों के बीच झड़पें हुईं जो धीरे-धीरे गैंगवार में बदल गई। 2013 के बाद यह दुश्मनी और खतरनाक हो गई। दोनों गुटों ने एक्सटॉर्शन, लूट, हत्या जैसी वारदात कीं और दिल्ली-हरियाणा में खूनी संघर्ष शुरू हो गया। इस गैंगवार में अब तक 20 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
गोगी की मौतः
24 सितंबर 2021 को रोहिणी कोर्ट में गोगी की पेशी चल रही थी। इस दौरान दो आरोपी वकीलों का काला कोट पहनकर कोर्ट में घुस गए और गोगी पर अंधाधुंध फायरिंग कर उसे मौत के घाट उतार दिया। हमलावर टिल्लू ताजपुरिया गैंग के सदस्य थे, जिन्हें टिल्लू ने जेल से प्लान करके भेजा था। पुलिस ने दोनों हमलावरों को मौके पर ही गोली मार दी।
टिल्लू ताजपुरिया की मौतः
2 मई 2023 को टिल्लू तिहाड़ जेल में बंद था। गोगी गैंग के योगेश उर्फ टुंडा, दीपक उर्फ तीतर समेत चार सदस्यों ने धारदार हथियारों से हमला करके उसे मौत के घाट उतार दिया। यह हत्या गोगी की मौत का बदला लेने के लिए की गई थी। दोनों सरगनाओं के मारे जाने के बावजूद उनके गुर्गे अभी भी पुरानी रंजिश निभा रहे हैं।




