गुरुग्राम, 17 फरवरी। सड़क दुर्घटनाओं के बाद का ‘गोल्डन आवर’ जीवन और मृत्यु के बीच की महीन रेखा साबित हो सकता है। ऐसे संवेदनशील समय में घायलों की मदद करने वाले नागरिकों को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र सरकार की ‘राह-वीर (नेक आदमी) योजना’ लागू है। उपायुक्त अजय कुमार ने नागरिकों से अपील की है कि वे दुर्घटना स्थल पर घायल व्यक्ति की सहायता करने से न डरें, क्योंकि कानून उन्हें पूर्ण संरक्षण प्रदान करता है।

उपायुक्त ने बताया कि मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 की धारा 134ए के तहत अधिसूचित ‘गुड समैरिटन’ नियमों में स्पष्ट प्रावधान है कि दुर्घटना पीड़ित की मदद करने वाले व्यक्ति को न तो हिरासत में लिया जा सकता है और न ही उससे जबरन व्यक्तिगत जानकारी मांगी जा सकती है। उसे अनावश्यक कानूनी प्रक्रियाओं में भी नहीं उलझाया जा सकता। इस व्यवस्था का उद्देश्य आम नागरिकों को भयमुक्त वातावरण देना है, ताकि वे मानवता के नाते आगे आ सकें।
डीसी अजय कुमार ने कहा कि समाज में कई तरह के भ्रम प्रचलित हैं, जैसे कि मदद करने पर पुलिस या अदालतों के चक्कर लगाने पड़ेंगे, अस्पताल में रुकना पड़ेगा या इलाज का खर्च उठाना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये सभी धारणाएं निराधार हैं। कानून के तहत राह-वीर को गुमनाम रहने का अधिकार है। उससे एफआईआर दर्ज कराने, गवाही देने या व्यक्तिगत विवरण साझा करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
उन्होंने जोर देकर कहा कि दुर्घटना के समय सहायता करने वाले व्यक्ति की सुरक्षा, सम्मान और गरिमा सुनिश्चित की जाती है। ऐसे मिथकों के कारण यदि लोग पीछे हटते हैं, तो यह मानवता के मूल भाव के विपरीत है। सरकार की मंशा है कि नागरिक बिना किसी डर के घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने या प्राथमिक सहायता दिलाने में सहयोग करें।
डीसी ने यह भी स्पष्ट किया कि राह-वीर बनने के लिए किसी विशेष चिकित्सकीय प्रशिक्षण या उपकरण की आवश्यकता नहीं है। कई बार सिर्फ एंबुलेंस को कॉल करना, ट्रैफिक नियंत्रित करना या घायल को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में सहयोग करना भी अमूल्य योगदान साबित होता है। समय पर उठाया गया छोटा कदम भी किसी परिवार के लिए नई सुबह बन सकता है।
‘राह-वीर (नेक आदमी) योजना’ के तहत दुर्घटना पीड़ित को गोल्डन आवर के भीतर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने में मदद करने वाले व्यक्ति को 25,000 रुपये की नकद राशि और प्रशंसा पत्र प्रदान किया जाता है। एक व्यक्ति को वर्ष में अधिकतम पांच बार तक यह सम्मान मिल सकता है।
उपायुक्त अजय कुमार ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि सड़क दुर्घटना देखने पर पीछे न हटें। आपकी तत्परता किसी की जिंदगी बचा सकती है। राह-वीर केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि साहस, संवेदनशीलता और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक है। जरूरत इस बात की है कि हम सभी जागरूक नागरिक बनकर गोल्डन आवर में मदद के लिए आगे आएं और मानवता की इस श्रृंखला को मजबूत करें।



