फरीदाबाद | 15 फरवरी 2026
फरीदाबाद में साइबर अपराध का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर एक महिला से 30 लाख रुपये से अधिक की ठगी कर ली गई। मामले में साइबर थाना NIT फरीदाबाद की टीम ने कार्रवाई करते हुए बिहार से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है।

पुलिस प्रवक्ता के अनुसार, NIT क्षेत्र में रहने वाली एक महिला ने शिकायत दी कि 16 जून 2025 को उसके पास एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का इंस्पेक्टर बताया और कहा कि उसे एक गंभीर मामले में गिरफ्तार किया गया है। इसके कुछ देर बाद एक अन्य नंबर से वीडियो कॉल आई, जिसमें कथित पुलिस अधिकारी ने दावा किया कि महिला जेट एयरवेज मनी लॉन्ड्रिंग केस में आरोपी है और उसे “हाउस अरेस्ट” किया गया है।
ठगों ने महिला को डराने के लिए कहा कि उसके खिलाफ डिजिटल अरेस्ट के आदेश जारी किए जा रहे हैं। उसे निर्देश दिया गया कि वह न तो घर से बाहर जाए और न ही इस बारे में किसी को बताए। आरोपियों ने यह भी कहा कि पूरे मामले की सुनवाई व्हाट्सएप वीडियो कॉल के माध्यम से होगी, जिसमें उनके सीनियर अधिकारी और एक जज भी शामिल होंगे।
ठगों ने महिला से कहा कि केस से बचने के लिए उसे 6 करोड़ 80 लाख रुपये देने होंगे। बाद में कथित तौर पर समझौते के नाम पर 50 लाख रुपये की मांग की गई। डर और दबाव में आई महिला ने ठगों द्वारा बताए गए बैंक खाते में आरटीजीएस के जरिए 30 लाख 20 हजार रुपये ट्रांसफर कर दिए।
शिकायत मिलने के बाद साइबर थाना NIT में संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। तकनीकी जांच और बैंक खातों की पड़ताल के आधार पर पुलिस टीम ने बिहार के सिवान जिले से मासूम कुमार (29) और सुजित कुमार (31) को गिरफ्तार किया।
पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी सुजित कुमार इस मामले में खाता ऑपरेटर की भूमिका निभा रहा था, जबकि मासूम कुमार ने उक्त बैंक खाता ठगों को उपलब्ध कराया था। पुलिस के अनुसार, मासूम 12वीं पास है जबकि सुजित बीए स्नातक है। दोनों आरोपी संगठित साइबर ठगी गिरोह से जुड़े बताए जा रहे हैं।
पुलिस ने बताया कि इस मामले में पहले ही छह अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। गिरफ्तार दोनों आरोपियों को माननीय न्यायालय में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।
फरीदाबाद पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, वीडियो कॉल या खुद को पुलिस अधिकारी बताने वाले व्यक्ति के झांसे में न आएं। किसी भी प्रकार की धमकी या डिजिटल अरेस्ट जैसी बातों पर तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।



