गुरुग्राम। सेक्टर 46 स्थित प्रांगण में आयोजित हिंदू एकता सम्मेलन उत्साह, अनुशासन और सांस्कृतिक गरिमा के वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता रही। सम्मेलन का उद्देश्य समाज में सकारात्मक सोच, पारिवारिक मूल्यों और राष्ट्रीय चेतना को सुदृढ़ करना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ आर्य समाज द्वारा वैदिक हवन के साथ किया गया। मंत्रोच्चारण और हवन की सुगंध से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण हो उठा। उपस्थित जनसमूह ने श्रद्धा के साथ अनुष्ठान में भाग लिया, जिससे सम्मेलन की शुरुआत एक सशक्त सांस्कृतिक संदेश के साथ हुई।
मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित माननीय रोशन लाल जी ने ‘संघ की यात्रा’ और ‘पंच परिवर्तन’ विषय पर विस्तार से अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने समाज को आंतरिक सुदृढ़ता, संगठन और सहयोग की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि समाज में विरोध की बजाय समर्थन और समन्वय की भावना से कार्य करने की आवश्यकता है, तभी स्थायी और सकारात्मक परिवर्तन संभव है।

परिवार प्रबंधन विषय पर ब्रह्माकुमारी से जुड़ी बहन बबीता दीदी ने व्यावहारिक और जीवनोपयोगी मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने पारिवारिक संवाद, संस्कार और परस्पर सम्मान को परिवार की मजबूती का आधार बताया। उन्होंने कहा कि सशक्त परिवार ही सशक्त समाज की नींव रखता है।
जीवनशैली और आध्यात्मिक संतुलन पर प्रकाश डालते हुए आर्ट ऑफ लिविंग की ओर से राजेश सुरेखा ने सरल शब्दों में बताया कि आधुनिक जीवन की व्यस्तता के बीच मानसिक शांति और संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने दैनिक जीवन में योग, ध्यान और सकारात्मक सोच को अपनाने की प्रेरणा दी।
सम्मेलन में गुरुद्वारा से पधारे गगन सिद्धु ने भारतीय संस्कृति और संस्कारों की समृद्ध परंपरा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विविधता में एकता भारतीय समाज की सबसे बड़ी शक्ति है, जिसे सहेजना और आगे बढ़ाना हम सभी का दायित्व है।

वहीं गायत्री परिवार की ओर से रेखा जी ने समाज जागरण और नैतिक मूल्यों के प्रसार पर जोर दिया। उन्होंने युवाओं को सामाजिक जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रेरित किया। संघ की ओर से आचार्य हरिदास जी ने संगठन की भूमिका और राष्ट्र निर्माण में उसके योगदान पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने कहा कि संगठित समाज ही सशक्त राष्ट्र का आधार बनता है।
कार्यक्रम में सुदर्शन महाराज जी के प्रेरणादायक उद्बोधन ने उपस्थित जनों में विशेष उत्साह का संचार किया। उनके मार्गदर्शन में सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया गया, जिससे वातावरण भक्तिमय हो उठा। बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने श्रद्धा और अनुशासन के साथ इस पाठ में भाग लिया।
सम्मेलन के दौरान बच्चों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम और नृत्य ने कार्यक्रम में रंग भर दिए। देशभक्ति और सांस्कृतिक थीम पर आधारित प्रस्तुतियों ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। इसके पश्चात प्रतिभागियों को सम्मानित करते हुए पुरस्कार वितरण किया गया।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस अवसर पर दुर्गा वाहिनी सहित अनेक सहयोगी संगठनों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। आयोजन समिति ने सभी अतिथियों, वक्ताओं, प्रतिभागियों और सहयोगी संस्थाओं का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को निरंतर जारी रखने का संकल्प दोहराया।
सेक्टर 46 में आयोजित यह सम्मेलन सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक जागरूकता और संगठनात्मक एकता का एक प्रभावशाली मंच बनकर उभरा।



