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Reporter: Pardeep Narula
Author: Pardeep Narula
हरियाणा के चार प्रमुख सरकारी अस्पतालों में दिल के मरीजों को मिलने वाली राहत फिलहाल थम गई है। राज्य के पंचकूला, अंबाला, गुरुग्राम और फरीदाबाद में संचालित हॉर्ट सेंटरों ने BPL और आयुष्मान भारत योजना के तहत इलाज बंद कर दिया है। इस फैसले के पीछे भुगतान में देरी मुख्य कारण बताया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, इन हॉर्ट सेंटरों का संचालन एक निजी हेल्थकेयर कंपनी द्वारा किया जा रहा था, जिसने स्वास्थ्य विभाग के साथ समझौते के तहत सेवाएं शुरू की थीं। शर्त यह थी कि मरीजों के इलाज के बिल 45 दिनों के भीतर क्लियर किए जाएंगे। लेकिन लंबे समय से भुगतान न होने के चलते कंपनी पर आर्थिक दबाव बढ़ता गया।
बताया जा रहा है कि करीब 30 करोड़ रुपये की राशि अब तक बकाया है। इसी कारण कंपनी ने कैशलेस इलाज की सुविधा रोकने का फैसला लिया। इसका सीधा असर उन मरीजों पर पड़ा है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और सरकारी योजनाओं के तहत मुफ्त या सस्ते इलाज पर निर्भर थे।
हर दिन इन चारों सेंटरों पर सैकड़ों मरीज इलाज के लिए पहुंचते थे। सेवाएं बंद होने के बाद अब मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, जहां इलाज महंगा पड़ सकता है।
पंचकूला अस्पताल प्रशासन का कहना है कि भुगतान प्रक्रिया जारी है, लेकिन कुछ बिलों से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों के कारण देरी हुई है। वहीं कंपनी की ओर से साफ कहा गया है कि जब तक बकाया राशि का भुगतान नहीं होता, तब तक सेवाएं बहाल करना संभव नहीं है।
इस स्थिति ने स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर तब जब योजनाएं गरीबों को राहत देने के लिए बनाई जाती हैं। अब सभी की नजर इस पर है कि सरकार और कंपनी के बीच यह विवाद कब सुलझता है और मरीजों को राहत कब मिलती है।




