Bilkul Sateek News
Reporter: Pardeep Narula
Author: Pardeep Narula
गुरुग्राम में PGF कंपनी की सीज प्रॉपर्टी की फर्जी रजिस्ट्री कर बेचने के मामले में पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। आर्थिक अपराध शाखा-1 (EOW) की टीम ने इस बार बेंगलुरु से आरोपी को पकड़ा है। आरोपी पर आरोप है कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर फर्जी पहचान, नकली दस्तावेज और फर्जी बैंक खातों के जरिए करोड़ों की प्रॉपर्टी धोखाधड़ी को अंजाम दिया।

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी की पहचान राजेंद्र सिंह के रूप में हुई है, जो नेपाल के कैलाली जिले का रहने वाला है। वह इस पूरे खेल में फर्जी नाम “रविंद्र प्रसाद” से काम कर रहा था। जांच में सामने आया कि उसने नकली आधार और पैन कार्ड बनवाकर बैंक खाते खुलवाए और खुद को PGF कंपनी का अधिकृत व्यक्ति बताकर फर्जी बैंकिंग ट्रेल तैयार की।
क्या है पूरा मामला?: यह मामला गुरुग्राम के सुषांत लोक-3 स्थित प्लॉट नंबर 131-G से जुड़ा है। यह प्रॉपर्टी PGF Limited की थी और सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित कमेटी के कंट्रोल में थी। यानी इस प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री बिना अनुमति नहीं हो सकती थी। आरोप है कि इसके बावजूद आरोपियों ने फर्जी बोर्ड रेजोल्यूशन, नकली कागजात और गलत घोषणाओं के जरिए इस प्रॉपर्टी की अवैध रजिस्ट्री करवा दी। इतना ही नहीं, रजिस्ट्री के बाद प्रॉपर्टी बेचकर रकम भी निकाल ली गई।
ऐसे रचा गया पूरा खेल: पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी ने अपने साथियों के साथ मिलकर पहले फर्जी पहचान तैयार की। इसके बाद नकली दस्तावेजों के सहारे PGF कंपनी के नाम पर करंट अकाउंट खुलवाया गया। इस खाते में प्रॉपर्टी डील से जुड़ी रकम डलवाई गई और बाद में चेक के जरिए पैसा निकाल लिया गया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह दिल्ली में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करता था। इसी दौरान कुछ लोगों के संपर्क में आया, जिन्होंने उसे फर्जी दस्तावेज बनवाने और बैंक खाते खुलवाने के लिए इस्तेमाल किया। बदले में उसे करीब 5 लाख रुपये मिले थे।
पहले भी हो चुकी है गिरफ्तारी: इस केस में गुरुग्राम पुलिस पहले भी एक आरोपी को गिरफ्तार कर चुकी है। अब तक इस मामले में कुल दो आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। पुलिस का कहना है कि इस पूरे रैकेट में शामिल बाकी लोगों की पहचान की जा रही है।
अब आगे क्या?: पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए, बैंक खाता खुलवाने में किसने मदद की और प्रॉपर्टी डील से निकला पैसा किन-किन लोगों तक पहुंचा। मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
