गुरुग्राम, 14 फरवरी 2026
ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित “सरस आजीविका मेला 2026” में वीकेंड पर खरीदारी और मनोरंजन का अनोखा संगम देखने को मिला। महाशिवरात्रि के पावन अवसर और सांस्कृतिक संध्या के विशेष आयोजन ने मेले को उत्सव में बदल दिया। शाम को मशहूर गायिका शिबानी कश्यप की प्रस्तुति ने माहौल को सुरमयी बना दिया। जैसे ही उन्होंने अपना लोकप्रिय गीत “आ भी जा सोनिया…” गाया, दर्शक झूम उठे। कार्यक्रम के दौरान दर्शकों की फरमाइश पर भी उन्होंने कई गीत प्रस्तुत किए, जिससे पूरा पंडाल तालियों और उत्साह से गूंज उठा।

सरस मेला प्रतिदिन आयोजित हो रही सांस्कृतिक संध्या के माध्यम से आगंतुकों को मनोरंजन का विशेष अनुभव दे रहा है। वीकेंड पर परिवारों, युवाओं और बच्चों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही।
महाशिवरात्रि के चलते मेले में आध्यात्मिक रंग भी खास तौर पर दिखाई दिया। देशभर से आई स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं हस्तनिर्मित उत्पाद, पारंपरिक वस्त्र, आभूषण, हस्तशिल्प और ऑर्गेनिक उत्पादों की प्रदर्शनी व बिक्री कर रही हैं। शिवरात्रि विशेष पूजा सामग्री, रुद्राक्ष माला, शिव प्रतिमाएं और पारंपरिक सजावटी वस्तुओं की स्टॉलों पर विशेष रौनक रही।
मध्यप्रदेश पवेलियन के स्टॉल नंबर 229 पर पीतल से निर्मित शिव-पार्वती की आकर्षक मूर्तियां लोगों का ध्यान खींच रही हैं। शिल्पकार ने बताया कि इन मूर्तियों को बनाने की प्रक्रिया जटिल है। पहले पीतल को सांचे में ढाला जाता है और फिर पूरी मूर्ति को तैयार होने में लगभग पांच दिन का समय लगता है। वे पिछले 15 से 20 वर्षों से इस पारंपरिक कला से जुड़ी हुई हैं।
मेले के फूड कोर्ट में भी खास चहल-पहल रही। व्रत के विशेष व्यंजन, फलाहार, पारंपरिक मिठाइयां और क्षेत्रीय पकवान आगंतुकों को खूब भा रहे हैं। स्टॉल नंबर 28 पर शिवरात्रि स्पेशल ठंडाई विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। केसर, बादाम, पिस्ता, खसखस, शंखपुष्पी, काली मिर्च और सौंफ से तैयार यह पेय ऊर्जा और ताजगी प्रदान करता है।
सरस मेला न केवल खरीदारी का मंच है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं की आजीविका को सशक्त बनाने और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने का प्रभावी माध्यम भी है।
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