गुरुग्राम में रविवार की शाम भक्ति, संगीत और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा सेक्टर 17A, सुखराली एन्क्लेव स्थित Bliss Premier में “शिव स्तुति संगीत संध्या” का भव्य आयोजन किया गया। शिव महिमा के गीतों से सजा यह कार्यक्रम पूरी तरह शिवमय वातावरण में परिवर्तित हो गया, जहां श्रद्धा और सुरों की गूंज देर शाम तक बनी रही।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसके बाद कलाकारों ने गीत और नृत्य के माध्यम से परमात्मा शिव से जुड़े आध्यात्मिक रहस्यों को जीवंत प्रस्तुतियों के जरिए अभिव्यक्त किया। शिवरात्रि के पावन अवसर के निकट आयोजित इस संध्या में भक्ति भाव के साथ-साथ आध्यात्मिक चिंतन का भी समावेश रहा।

ओआरसी की निदेशिका राजयोगिनी बीके आशा दीदी ने शिवरात्रि के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “जागरण” का वास्तविक अर्थ केवल रात भर जागना नहीं, बल्कि आत्म चेतना की जागृति है। उन्होंने कहा कि व्रत का अर्थ केवल एक दिन का शारीरिक उपवास नहीं, बल्कि मन के नकारात्मक विचारों से दूरी बनाकर आंतरिक शुद्धता का संकल्प लेना है। “मन के विकारों से उपवास ही असली उपवास है,” उन्होंने कहा।

बीके आशा दीदी ने आगे कहा कि ईश्वर एक है और यदि सभी मनुष्य ईश्वर के सत्य स्वरूप को पहचान लें, तो समाज में स्वतः ही एकता स्थापित हो सकती है। उन्होंने परमात्मा शिव को सत्य, अनादि और अविनाशी सत्ता बताते हुए कहा कि आध्यात्मिक ज्ञान से ही जीवन में स्थायी शांति और संतुलन संभव है।
कार्यक्रम में भिवाड़ी के सिटी नर्सिंग होम के निदेशक डॉ. रूप सिंह ने भी अपने विचार रखे। उन्होंने योग और मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि अत्यधिक तनाव से शरीर में बीमारियों से जुड़े जीन सक्रिय हो सकते हैं। “खुशी सबसे बड़ी औषधि है। जब हम प्रसन्न रहते हैं, तो शरीर स्वयं को हील करने की क्षमता विकसित करता है,” उन्होंने कहा।
संगीत संध्या की मुख्य आकर्षण प्रस्तुति प्रसिद्ध पार्श्व गायक पंडित ब्रजेश मिश्रा और ओआरसी के गायक चांद बजाज की रही, जिन्होंने शिव स्तुति के सुमधुर भजनों से श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। वहीं, प्रसिद्ध नृत्य कलाकार डॉ. दीपक अरोड़ा, डॉ. शुभ्रा और उनके शिष्यों ने शिव महिमा पर आधारित नृत्य प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया।
कार्यक्रम में शहर के गणमान्य नागरिकों सहित 400 से अधिक लोगों ने भाग लिया। श्रद्धा, संगीत और आध्यात्मिक संदेश से भरपूर इस आयोजन ने उपस्थित जनसमूह को आत्मचिंतन और सकारात्मक जीवन मूल्यों की ओर प्रेरित किया। गुरुग्राम में आयोजित यह शिव स्तुति संगीत संध्या न केवल भक्ति का उत्सव बनी, बल्कि आत्म जागृति का संदेश भी दे गई।
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