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Reporter: Pardeep Narula
Author: Pardeep Narula
नई दिल्ली, 18 फरवरी।
राजधानी में आयोजित India AI Impact Expo 2026 में इस बार बिहार ने तकनीक आधारित शासन का ऐसा मॉडल प्रस्तुत किया, जिसने नीति-निर्माताओं, प्रशासनिक अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। हॉल नंबर-5 के प्रथम तल पर बने बिहार पवेलियन में राज्य निर्वाचन आयोग, बिहार और बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (BIPARD) गया के Bihar GenNext Lab ने मिलकर डिजिटल लोकतंत्र और स्मार्ट गवर्नेंस की नई तस्वीर पेश की।

बुधवार को पवेलियन का दौरा करने वालों में राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा और इस्पात मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव संदीप पौंड्रिक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल रहे। संजय झा ने कहा कि मोबाइल आधारित ई-वोटिंग, एआई आधारित काउंटिंग और डेटा-ड्रिवन गवर्नेंस की पहल नए भारत के डिजिटल लोकतंत्र की दिशा तय कर रही है। उनके अनुसार, यह मॉडल पारदर्शिता, समावेशन और जवाबदेही को मजबूती देता है।

देश का पहला मोबाइल आधारित रिमोट ई-वोटिंग सिस्टम
राज्य निर्वाचन आयोग, बिहार ने शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए देश का पहला राज्य-स्तरीय मोबाइल आधारित रिमोट ई-वोटिंग सिस्टम प्रदर्शित किया। यह व्यवस्था प्रवासी मतदाताओं, बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और अस्पताल में भर्ती मतदाताओं को ध्यान में रखकर विकसित की गई है। एआई, फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) और ब्लॉकचेन तकनीक के उपयोग से यह सिस्टम वोट की अपरिवर्तनीयता सुनिश्चित करता है। आयोग के कमिश्नर डॉ. दीपक प्रसाद के अनुसार, यह पहल लोकतांत्रिक भागीदारी को नई ऊंचाई देने की क्षमता रखती है।
फर्जी वोटिंग पर तकनीकी रोक
पवेलियन में FRS आधारित वोटर वेरिफिकेशन मोबाइल ऐप भी प्रदर्शित किया गया, जो फेशियल रिकग्निशन के माध्यम से फर्जी या डुप्लीकेट मतदान को रोकने में सक्षम है। यह ऐप पुराने ईपीआईसी फोटो के साथ भी सटीक मिलान कर सकता है और ऑफलाइन मोड में भी कार्य करता है। इससे चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता और सुरक्षा को मजबूती मिलती है।

एआई आधारित ओसीआर काउंटिंग सिस्टम
चुनाव परिणामों की पारदर्शिता और गति बढ़ाने के लिए एआई आधारित ओसीआर काउंटिंग सिस्टम भी पेश किया गया। यह तकनीक ईवीएम डिस्प्ले से लाइव आंकड़ों का डिजिटल एक्सट्रैक्शन और वैलिडेशन करती है। वीडियो आधारित स्थायी डिजिटल रिकॉर्ड और टाइम-स्टैम्प ऑडिट लॉग तैयार किए जाते हैं, जिससे किसी भी स्तर पर सत्यापन संभव हो जाता है। इस तकनीक का उपयोग बिहार के नगर पालिका और पंचायत चुनावों में सफलतापूर्वक किया जा चुका है।
Bihar GenNext Lab के 7 डिजिटल कियोस्क
BIPARD गया परिसर में स्थापित Bihar GenNext Lab प्रशासनिक प्रशिक्षण और डेटा-आधारित शासन का अत्याधुनिक केंद्र बनकर उभरा है। यहां 7 डिजिटल कियोस्क के माध्यम से एआई, डेटा साइंस और जीआईएस आधारित गवर्नेंस मॉडल प्रदर्शित किया गया।
डैशबोर्ड कियोस्क 45 विभागों और 38 जिलों का रियल टाइम डेटा विजुअलाइजेशन प्रस्तुत करता है। डेटा रिपॉजिटरी कियोस्क सभी विभागों के आंकड़ों को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराता है। जीआईएस मैपिंग कियोस्क पंचायत से राज्य स्तर तक सरकारी संस्थानों की लोकेशन दर्शाता है।
‘Ask Aryabhat’ नामक एआई आधारित चैटबॉट अधिकारियों को विभागीय डेटा के विश्लेषण और तुलना में सहायता देता है। ‘Bihar at its Grassroots’ कियोस्क जिलों की सफलता कहानियों को प्रदर्शित करता है, जबकि ‘CollabNote’ डिजिटल वर्कस्पेस के माध्यम से विभागीय समन्वय को सरल बनाता है। ‘Bihar Map’ इंटरैक्टिव मानचित्र के जरिए जिला-वार विकास की त्वरित जानकारी उपलब्ध कराता है।
BIPARD के महानिदेशक डॉ. बी. राजेंद्र ने कहा कि इस मंच के माध्यम से बिहार में प्रशासनिक प्रशिक्षण, डिजिटल गवर्नेंस और एआई आधारित क्षमता निर्माण की पहलों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किया गया है। उनका उद्देश्य तकनीक-सक्षम और जवाबदेह शासन व्यवस्था को सुदृढ़ करना है।
भविष्य के प्रशासन की झलक
एक्सपो में बिहार का मॉडल केवल तकनीकी प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भविष्य के प्रशासनिक ढांचे की स्पष्ट झलक भी प्रस्तुत करता है। चुनाव प्रक्रिया से लेकर नीति निर्माण और जमीनी क्रियान्वयन तक डेटा और एआई का उपयोग पारदर्शिता, दक्षता और जवाबदेही को मजबूत कर रहा है। बिहार पवेलियन ने यह संदेश दिया कि सही दिशा में प्रयुक्त तकनीक लोकतंत्र को अधिक सहभागी, सुरक्षित और प्रभावी बना सकती है। आने वाले समय में यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरक बन सकता है।




