गुरुग्राम में शिक्षा के नाम पर कथित छल का एक गंभीर मामला सामने आया है। सेक्टर-9B स्थित Educrest International School के प्रबंधन और स्टाफ के खिलाफ धोखाधड़ी का अभियोग दर्ज किया गया है। आरोप है कि विद्यालय ने स्वयं को Central Board of Secondary Education (सीबीएसई) से मान्यता प्राप्त बताकर अभिभावकों को भ्रमित किया और छात्राओं का भविष्य दांव पर लगा दिया।

पुलिस थाना सेक्टर-9A, गुरुग्राम में दर्ज इस मामले में Bharatiya Nyaya Sanhita की धारा 318(4), 316(2) व 3(5) के तहत धोखाधड़ी, कूटरचना और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित प्रावधानों के अंतर्गत अभियोग अंकित किया गया है। यह कार्रवाई 18 फरवरी 2026 को एक अभिभावक की लिखित शिकायत के आधार पर की गई।
शिकायतकर्ता के अनुसार उनकी बेटी उक्त विद्यालय में कक्षा 10वीं की छात्रा है। प्रवेश के समय स्कूल प्रबंधन ने दावा किया था कि संस्थान सीबीएसई से विधिवत संबद्ध है। विद्यालय परिसर में मान्यता प्रमाण-पत्र और संबद्धता संख्या प्रदर्शित की गई थी, जिससे अभिभावकों को भरोसा हुआ कि छात्रा को मानक शिक्षा और बोर्ड परीक्षा में वैध भागीदारी का अवसर मिलेगा। इसी विश्वास के आधार पर छात्रा का प्रवेश कराया गया।
आरोप है कि विद्यालय ने नियमित रूप से विभिन्न मदों में शुल्क वसूला। इनमें ट्यूशन फीस, बिल्डिंग फंड, परीक्षा शुल्क, कंप्यूटर शुल्क और अन्य शैक्षणिक शुल्क शामिल हैं। अभिभावकों ने यह सोचकर भुगतान किया कि विद्यालय मान्यता प्राप्त है और छात्रा का शैक्षणिक भविष्य सुरक्षित हाथों में है।
मामला तब गंभीर हुआ जब कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षा के समय छात्रा को एडमिट कार्ड उपलब्ध नहीं कराया गया। पूछताछ करने पर स्पष्ट उत्तर नहीं दिया गया। बाद में स्वतंत्र रूप से जांच करने पर शिकायतकर्ता को पता चला कि विद्यालय न तो सीबीएसई से संबद्ध है और न ही उसे वैध मान्यता प्राप्त है। कथित रूप से जो रजिस्ट्रेशन या संबद्धता नंबर दर्शाया गया था, वह भी गलत पाया गया।
इस घटनाक्रम से छात्रा का एक पूरा शैक्षणिक वर्ष प्रभावित हुआ। अभिभावकों का कहना है कि यह केवल वित्तीय धोखाधड़ी नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य से जुड़ा गंभीर अपराध है। एक वर्ष का शैक्षणिक नुकसान किसी भी विद्यार्थी के आत्मविश्वास और करियर की दिशा पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।
शिकायत में विद्यालय के चेयरमैन विनय कटारिया, प्रिंसिपल रिद्धिमा कटारिया, वाइस प्रिंसिपल सिमर बत्रा, कोऑर्डिनेटर सोनिया तथा अन्य संबंधित स्टाफ सदस्यों को नामजद आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने मामले की जांच प्रारंभ कर दी है और संबंधित दस्तावेज, मान्यता रिकॉर्ड तथा वित्तीय लेन-देन की पड़ताल की जा रही है। साथ ही शिक्षा विभाग और बोर्ड अधिकारियों से भी आधिकारिक जानकारी प्राप्त की जाएगी ताकि तथ्यों की पुष्टि की जा सके।
गुरुग्राम पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बच्चों के भविष्य से जुड़े मामलों को अत्यंत गंभीरता से लिया जाता है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित आरोपियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान में प्रवेश दिलाने से पूर्व उसकी मान्यता और संबद्धता की आधिकारिक पुष्टि अवश्य करें। बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर संबद्धता संख्या की जांच की जा सकती है। किसी प्रकार की शंका होने पर संबंधित थाना या पुलिस हेल्पलाइन पर तत्काल संपर्क करना चाहिए।
यह मामला शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और अभिभावकों की सजगता की आवश्यकता को एक बार फिर रेखांकित करता है। बच्चों का भविष्य विश्वास की नींव पर खड़ा होता है, और यदि वही नींव संदिग्ध हो जाए तो पूरा ढांचा हिल जाता है। अब सभी की निगाहें जांच के निष्कर्ष और आगामी कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं।




