Bilkul Sateek News
Reporter: Sonu Rana
Author: Sonu Rana
गुड़गांव।
गुड़गांव में जहां एक तरफ वर्षा की वजह से गर्मी से थोड़ी राहत मिली ही थी कि बुधवार सुबह स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने से हड़कंप मच गया। आनन फानन में गुड़गांव के बड़े स्कूलों के प्रबंधन ने स्कूलों से बच्चों को निकाला। फिलहाल बम स्क्वायट स्कूलों में जांच कर रही है। प्रारंभिक जांच में किसी स्कूल में विष्फोटक नहीं मिला है। पुलिस जांच कर रही है कि यह ईमेल किसने भेजा था।

जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह गुड़गांव पुलिस को कई स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिलने की जानकारी मिली। जानकारी मिलते ही पुलिस हरकत में आई और अलग-अलग विभाग के अधिकारियों को सूचित कर स्कूलों को खाली करवाया।
सूत्रों के अनुसार, एमिटी, श्रीराम जैसे कई स्कूलों में सुबह करीब साढ़े आठ बजे एक बार फिर बम से उड़ाने की धमकी भरा ईमेल भेजा गया। धमकी मिलते ही स्कूल प्रशासन में हड़कंप मच गया और तुरंत इमरजेंसी प्रोटोकॉल लागू कर दिया गया। धमकी भरे ईमेल में स्कूलों को बम से उड़ाने की बात कही गई है। साथ ही अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन और रेवाड़ी रेलवे स्टेशन को भी उड़ाने की धमकी दी गई। ईमेल में हरियाणा को खालिस्तान बनाने का दावा किया गया।
इस ईमेल के बाद स्कूलों को तुरंत करवा दिया गया। स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों को मैसेज भेजकर बच्चों को जल्दी से घर ले जाने को कहा। स्कूल के बाहर माता-पिता की भीड़ जमा हो गई। डरे-सहमे अभिभावक अपने बच्चों को लेने पहुंचे तो चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल था। पुलिस और बम स्क्वायड की टीमें तुरंत स्कूलों में पहुंच गईं। स्निफर डॉग्स और बम डिस्पोजल यूनिट के जवान स्कूल परिसर की बारीकी से तलाशी ले रहे हैं। स्कूल प्रबंधन ने भी अभिभावकों से अपील की है कि घबराएं नहीं, लेकिन बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें घर ले जाएं। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि यह ईमेल फर्जी है। किसी भी स्कूल में कोई बम आदि बरामद नहीं हुआ है। पुलिस पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह ईमेल किसने भेजा।
धमकी देने वालों का पता नहीं
गुड़गांव समेत दिल्ली एनसीआर के स्कूलों को बम की धमकी मिलने का यह सिलसिला पिछले कई महीनों से चल रहा है। हर बार ईमेल से धमकी आती है, स्कूल खाली कराए जाते हैं और पुलिस जांच करती है। अब तक ज्यादातर मामलों में यह धमकियां फर्जी निकली हैं, लेकिन हर बार अभिभावकों और बच्चों में भारी दहशत फैल जाती है। हालांकि पुलिस ज्यादातर मामलों में पता नहीं लगा पाती है कि यह धमकियां कहां से भेजी जाती है।




