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फरीदाबाद (अजय वर्मा), 9 जुलाई। फरीदाबाद में नेहरू कॉलोनी के हजारों निवासी धरने पर बैठे हुए हैं, उनके चेहरे पर अपने आशियाने टूटने का डर साफ नजर आ रहा है। प्रशासन द्वारा कॉलोनी में तोड़फोड़ का नोटिस लगाए जाने के बाद से ही यहां का हर एक निवासी डर-डर के साये में जी रहा है। यहां कल तोड़फोड़ की आशंका के चलते लोगों ने स्पष्ट चेतवानी दी है कि बुलडोजर उनके ऊपर से होकर बस्ती में गुजरेगा और वे अपने मकानों के साथ ही दफन हो जाएंगे।
बताया जा रहा है कि पूर्वांचल की एक महिला ने नोटिस आने के बाद अपनी जान दे दी। नेहरू कॉलोनीवासियों ने यहां तक कहा है कि वे सरकार को इन जमीनों का सर्कल रेट पर भुगतान करने के लिए तैयार हैं और उन्हें यहां से ना उजाड़ा जाए। इस कॉलोनी को बसे हुए लगभग 50 साल हो चुके हैं। इन 50 साल के दौरान यहां पर कांग्रेस, इनेलो से लेकर भाजपा की सरकारों के शासनकाल में हजारों मकान बन चुके हैं। यहां के निवासियों के राशन कार्ड, आधार कार्ड तक बने हुए हैं और वह हाउस टैक्स भी जमा करते हैं। ऐसे में प्रशासन द्वारा इसे अवैध घोषित किया जाना कितना उचित है। ऐसे में यह भी यक्ष प्रश्न उठता है कि क्या इस अवैध कॉलोनी में अपना तिनका-तिनका जोड़ कर अपने सपनों का घर बनाने वाले यह लोग ही पूरी तरह से जिम्मेदार हैं या फिर इसके लिए भू-माफिया या फिर वो सरकारी अधिकारी और नेता जिम्मेदार हैं जिनके संरक्षण में यह कॉलोनी 50 साल तक फलती-फूलती रही।