शक्ति वाहिनी और एमडीडी ऑफ इंडिया के सहयोग से जिले में जागरूकता कार्यक्रम
स्कूलों, संस्थानों और धार्मिक स्थलों में कार्यक्रम एवं शपथ समारोह
Bilkul Sateek News
गुरुग्राम, 28 नवंबर। गुरुग्राम में बाल विवाह रोकने के लिए जिला प्रशासन के साथ कई कदम उठाए जा रहे हैं। भारत सरकार के 100 दिन के अभियान से प्रेरित होकर, शक्ति वाहिनी और एमडीडी ऑफ इंडिया ने सभी एजेंसियों के साथ मिलकर काम करने का फैसला किया है, ताकि गुरुग्राम को बाल विवाह मुक्त जिला बनाया जा सके।
‘100 दिन का इंटेंसिव अवेयरनेस कैंपेन, जिसे बाल विवाह मुक्त भारत के एक वर्ष पूर्ण होने पर राष्ट्रव्यापी रूप से शुरू किया गया है, एक लक्षित रणनीति पर आधारित है। यह रणनीति स्कूलों व शैक्षणिक संस्थानों, धार्मिक स्थलों जहां विवाह संपन्न होते हैं, विवाह संबंधी सेवा प्रदाताओं, तथा अंततः पंचायतों और नगर वार्डों—सभी को शामिल करते हुए इस प्राचीन अपराध को समाप्त करने पर केंद्रित है। शक्ति वाहिनी और एमडीडी ऑफ इंडिया, जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन (JRC) के पार्टनर हैं, जो 451 जिलों में काम करने वाले 250 से अधिक संगठनों का भारत का सबसे बड़ा नेटवर्क है। पिछले एक वर्ष में इस नेटवर्क ने देशभर में एक लाख से अधिक बाल विवाह रोके हैं।



बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की पहली वर्षगांठ 27 नवंबर 2024 को चिन्हित करने के लिए शक्ति वाहिनी और एमडीडी ऑफ इंडिया ने स्कूलों, संस्थानों और ग्रामीण समुदायों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए और पूरे जिले में शपथ समारोह संपन्न करवाए। एनजीओ ने समुदायों को बाल विवाह निषेध अधिनियम के प्रावधानों के बारे में भी जागरूक किया, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि बाल विवाह में शामिल होने वाले किसी भी सेवा प्रदाता—जैसे कैटरर, मेहमान, टेंट प्रदाता, या विवाह संपन्न कराने वाले धार्मिक व्यक्ति—को दंडित किया जा सकता है।
27 नवंबर को बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के एक वर्ष पूर्ण होने पर शक्ति वाहिनी और एमडीडी ऑफ इंडिया ने जिले के बाल संरक्षण हितधारकों के सहयोग से स्कूलों में कई जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए। इन कार्यक्रमों में सीडब्ल्यूसी चेयरपर्सन उषा रानी और सीडब्ल्यूसी सदस्यों मधु जैन, बाल विवाह निषेध अधिकारी संजय कुमार, गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल सरहोल, किडज़ी स्कूल की चेयरपर्सन सोनू कटारिया, बसई सरकारी स्कूल की प्रिंसिपल गीता और आरपीएफ के एसएचओ नवल किशोर ने भाग लिया। जिला एएचटीयू टीम ने भी कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। बच्चों को उनके अधिकारों के बारे में जानकारी दी गई और बाल विवाह मुक्त भारत के लिए शपथ दिलाई गई। जिन स्कूलों में प्रोग्राम हुए, उनमें गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी गर्ल्स स्कूल, सरहोल गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी बॉयज़ स्कूल, सरहोल और गवर्नमेंट जूनियर प्राइमरी स्कूल, कादीपुर शामिल थे।
सरकार की घोषणा से उत्साहित होकर, जो इस अभियान को और गति देगी, एनजीओ निदेशक निशी कांत ने कहा कि ये 100 दिन का गहन अभियान इस देश की दिशा बदलने और हमें प्रधानमंत्री के विकसित भारत के दृष्टिकोण के करीब लाने की शक्ति रखते हैं। पीढ़ियों से हमारी बेटियों को अवसरों से वंचित किया गया है और विवाह के नाम पर उन्हें शोषण, अत्याचार का सामना करना पड़ा है। चुने हुए प्रतिनिधियों, सरकारी विभागों, कानून प्रवर्तन एजेंसियों और समुदायों का यह अभूतपूर्व समन्वय बाल विवाह समाप्त करने की भारत की प्रतिबद्धता में एक गेमचेंजर है। इस समन्वय और सामूहिक संकल्प के साथ, हमें विश्वास है कि हम अपने जिले को एक वर्ष के भीतर बाल विवाह मुक्त बना देंगे और अब कोई भी परदा इस अपराध को छुपा नहीं सकता।
100 दिन का यह गहन जागरूकता अभियान तीन चरणों में आगे बढ़ाया जाएगा और इसका समापन 8 मार्च 2026 को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर होगा। कार्यक्रम का पहला चरण (1–31 दिसंबर) स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से जागरूकता फैलाने पर केंद्रित रहेगा। दूसरा चरण (1–31 जनवरी 2026) धार्मिक स्थलों जैसे मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा तथा विवाह से जुड़े सेवा प्रदाताओं जैसे वेडिंग हॉल, बैंड पार्टी और टेंट हाउस पर ध्यान केंद्रित करेगा। तीसरा चरण 8 मार्च 2026 तक ग्राम पंचायतों और नगर पालिका वार्डों में समुदाय-आधारित सहभागिता और स्वामित्व को मजबूत करने पर आधारित होगा।




