गुरुग्राम में घोषित देशव्यापी भारत बंद की गूंज उतनी तेज़ सुनाई नहीं दे रही, जितनी उम्मीद की जा रही थी। शहर की सड़कों पर रोज़मर्रा की रफ्तार बरकरार है। बस अड्डों पर हलचल सामान्य है, रोडवेज की बसें तय समय पर दौड़ रही हैं और बाज़ारों में दुकानों के शटर रोज़ की तरह ऊपर उठ चुके हैं। इफ्को चौक से लेकर फर्रुखनगर तक व्यापारिक गतिविधियां बिना किसी बड़े व्यवधान के जारी हैं।

गौरतलब है कि संयुक्त किसान मोर्चा ने US ट्रेड डील के विरोध में किया था भारत बंद का आह्वान लेकिन गुरुग्राम में भारत बंद का असर नहीं दिखा। सुबह दस बजे तक अधिकांश बैंक खुल चुके थे। निजी बैंकों में कामकाज सामान्य रूप से चलता दिखा, जबकि कुछ सरकारी बैंकों की शाखाओं में शुरुआत धीमी रही। फिर भी ग्राहकों की आवाजाही पूरी तरह थमी नहीं। हालांकि यह संभावना जताई जा रही है कि दोपहर बाद हालात में कुछ बदलाव दिख सकता है।
केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से बुलाए गए इस बंद के पीछे कई मुद्दे हैं। नए श्रम संहिता कानून, भारत अमेरिका व्यापार समझौते, महंगाई, बेरोजगारी और किसान हितों से जुड़ी मांगों को लेकर संगठनों ने अपनी आवाज़ बुलंद की है। यूनियनों का दावा है कि जिले के विभिन्न विभागों के कर्मचारी और मजदूर इस हड़ताल का हिस्सा हैं, भले ही उसका असर ज़मीनी स्तर पर सीमित दिखाई दे रहा हो।
औद्योगिक क्षेत्रों में भी तस्वीर लगभग वैसी ही है। कई जगह कर्मचारियों ने सांकेतिक हड़ताल दर्ज कराते हुए काम जारी रखा है। उत्पादन पूरी तरह ठप नहीं हुआ, लेकिन कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधि अलग अलग स्थानों पर बैठकों के माध्यम से अपनी बात रख रहे हैं। विरोध की अभिव्यक्ति मौजूद है, पर कामकाज की मशीनरी पूरी तरह रुकी नहीं है।
रोडवेज यूनियन के नेता संजय दलाल के अनुसार बस सेवाएं सामान्य हैं, जिससे यात्रियों को खास असुविधा नहीं हुई। दोपहर दो बजे बस अड्डे पर कर्मचारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी और यह देखा जाएगा कि आंदोलन को किस दिशा में आगे बढ़ाया जाए।
कुल मिलाकर, गुरुग्राम में भारत बंद का असर फिलहाल हल्का दिख रहा है। शहर की रफ्तार धीमी नहीं पड़ी, बाजारों की चहल पहल कायम है और उद्योगों की धड़कन चल रही है। अब सबकी निगाह दोपहर बाद की गतिविधियों और बैठकों पर टिकी है, जहां से आंदोलन की अगली रूपरेखा सामने आ सकती है।



