सरस मेले का आज आखिरी दिन: लाइव डेमो बना आकर्षण का केंद्र, परंपरागत हुनर को मिल रही नई पहचान
Bilkul Sateek News
Reporter: Pardeep Narula
Author: Pardeep Narula
गुरुग्राम, 25 फरवरी 2026।
ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित सरस आजीविका मेला 2026 के अंतिम दिन लाइव डेमो क्षेत्र खास आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। देशभर से आई स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की महिलाएं पारंपरिक हस्तशिल्प और वस्त्र निर्माण की विधियों का सजीव प्रदर्शन कर रही हैं। आगंतुकों को जहां उत्पाद खरीदने का अवसर मिल रहा है, वहीं वे निर्माण प्रक्रिया को करीब से समझ भी पा रहे हैं।

हैंडलूम पर चादर बुनाई का लाइव प्रदर्शन
मेले में हैंडलूम के माध्यम से सिंगल और डबल बेड चादर तैयार करने की पूरी प्रक्रिया का लाइव प्रदर्शन किया जा रहा है। करघे पर धागों को व्यवस्थित करना, डिजाइन उकेरना और निरंतर बुनाई के जरिए साधारण धागों को मजबूत और आकर्षक चादर में बदलते देख दर्शक उत्साहित नजर आ रहे हैं। कारीगर आगंतुकों को यह भी समझा रहे हैं कि हैंडलूम कैसे कार्य करता है और एक उत्कृष्ट उत्पाद तैयार करने में कितनी सावधानी, धैर्य और कौशल की आवश्यकता होती है।

जूट आभूषणों का सजीव निर्माण
पर्यावरण अनुकूल जूट से बनी चूड़ियों और कड़ों का लाइव डेमो भी लोगों को आकर्षित कर रहा है। महिलाएं मौके पर ही जूट को आकार देकर, रंगों से सजाकर और डिजाइन तैयार कर उसे सुंदर आभूषणों में बदलती नजर आ रही हैं।इस प्रक्रिया को देख दर्शक न केवल शिल्प की बारीकियों को समझ रहे हैं, बल्कि स्थानीय और इको-फ्रेंडली उत्पादों की ओर भी प्रेरित हो रहे हैं।
गुजराती कढ़ाई का मनमोहक प्रदर्शन
मेले में पारंपरिक गुजराती कढ़ाई (भारत) का सजीव प्रदर्शन भी किया जा रहा है। रंगीन धागों, शीशों और जटिल पैटर्न से कपड़ों पर की जाने वाली बारीक कढ़ाई को कारीगर अपने हाथों से तैयार करते हुए दिखा रहे हैं। इस लाइव डेमो से आगंतुकों को यह समझने का अवसर मिल रहा है कि एक कढ़ाईदार उत्पाद के पीछे कितनी मेहनत, धैर्य और रचनात्मकता जुड़ी होती है।

अंतिम दिन उमड़ी भीड़
उल्लेखनीय है कि सरस आजीविका मेला 2026 का आज अंतिम दिन है। ऐसे में बड़ी संख्या में लोग मेले का लाभ उठाने के लिए पहुंच रहे हैं। लाइव डेमो क्षेत्र में लगातार उमड़ रही भीड़ यह संकेत दे रही है कि लोग अब केवल खरीदारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि निर्माण प्रक्रिया को समझना और कारीगरों से संवाद करना भी चाहते हैं। यह पहल न केवल शिल्पकारों के आत्मविश्वास को बढ़ा रही है, बल्कि महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत के संदेश को भी मजबूत कर रही है।




