हरियाणा और पंजाब हाईकोर्ट ने गुरुग्राम के चर्चित सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बॉबी कटारिया को बड़ी राहत देते हुए नियमित जमानत दे दी है। मानव तस्करी और धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोपों से जुड़े इस मामले में यह फैसला न्यायमूर्ति अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल और न्यायमूर्ति दीपक मनचंदा की खंडपीठ ने सुनाया। इससे पहले पंचकूला स्थित एनआईए की विशेष अदालत ने 20 जुलाई 2024 को उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी थी, जिसके बाद हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।

मामला उन आरोपों से जुड़ा है जिनमें दावा किया गया कि विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से मोटी रकम वसूली गई। हरियाणा पुलिस ने 27 मई 2024 को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और इमीग्रेशन एक्ट की धारा 10 व 24 के तहत एफआईआर दर्ज की थी। बाद में जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंप दी गई। एजेंसी का आरोप है कि कटारिया और उनके सहयोगियों ने संयुक्त अरब अमीरात और सिंगापुर जैसे देशों में रोजगार का लालच देकर कुल 19 लाख 67 हजार रुपये इकट्ठा किए। हालांकि, कुछ लोगों को लाओस जैसे अन्य देशों में भेजे जाने का भी दावा किया गया।
जांच एजेंसी का कहना है कि पीड़ितों को जिस तरह के रोजगार और शर्तों का वादा किया गया था, वास्तविकता उससे अलग निकली। वहीं बचाव पक्ष ने अदालत में अलग तस्वीर पेश की। उनके वकीलों ने दलील दी कि संबंधित लोग स्वयं संपर्क में आए थे और विदेश जाने के लिए सेवाओं का भुगतान स्वेच्छा से किया था। यह भी कहा गया कि वे लोग विदेश गए, कुछ समय तक वहां रहे और काम की परिस्थितियों से असंतुष्ट होकर खुद लौट आए।

बचाव पक्ष ने अदालत को यह भरोसा भी दिलाया कि कथित रूप से ली गई 19.67 लाख रुपये की राशि का डिमांड ड्राफ्ट दो दिन के भीतर एनआईए की विशेष अदालत में जमा करा दिया जाएगा। साथ ही यह तर्क रखा गया कि कटारिया लगभग 20 महीनों से न्यायिक हिरासत में हैं और उनके खिलाफ कोई अन्य लंबित आपराधिक मामला नहीं है।हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आरोपी को आवश्यक जमानती बांड भरने होंगे और दो दिन के भीतर 19.67 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट एनआईए विशेष अदालत, पंचकूला में जमा कराना होगा। इसके अतिरिक्त अदालत ने यह भी शर्त लगाई कि वह किसी भी गवाह से संपर्क नहीं करेंगे और न ही उन्हें प्रभावित करने का प्रयास करेंगे।
फिलहाल मामला पंचकूला की एनआईए विशेष अदालत में विचाराधीन है। अब तक 73 में से 23 अभियोजन गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। आगे की सुनवाई में गवाहों की गवाही और साक्ष्यों के आधार पर केस की दिशा तय होगी।
हाईकोर्ट से मिली यह जमानत कानूनी प्रक्रिया का एक अहम पड़ाव है, लेकिन अंतिम फैसला अभी दूर है। अब सबकी नजरें एनआईए कोर्ट की अगली कार्यवाही पर टिकी हैं, जहां इस बहुचर्चित मामले की परतें धीरे धीरे खुलेंगी।



