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Reporter: Pardeep Narula
Author: Pardeep Narula
गुरुग्राम, 19 फरवरी। न्याय की राह को सरल और सुगम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए 14 मार्च को गुरुग्राम जिला न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में किया जा रहा है। कार्यक्रम का मार्गदर्शन वाणी गोपाल शर्मा, जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की चेयरमैन, द्वारा किया जा रहा है। वहीं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव राकेश कादियान के नेतृत्व में इस लोक अदालत का संचालन होगा।

राष्ट्रीय लोक अदालत का उद्देश्य लंबित मामलों के बोझ को कम करना और आमजन को त्वरित, सुलभ तथा स्थायी न्याय उपलब्ध कराना है। अदालत की औपचारिकताओं और लंबी तारीखों के बजाय यहां संवाद, सहमति और समझौते की राह से समाधान खोजा जाता है। यही कारण है कि लोक अदालत को न्याय व्यवस्था की एक प्रभावी और मानवीय पहल माना जाता है।
इस विशेष आयोजन में विभिन्न प्रकार के मामलों का निपटारा किया जाएगा। इनमें ट्रैफिक चालान, बैंक रिकवरी केस, मोटर वाहन दुर्घटना दावा प्रकरण, पारिवारिक विवाद, दीवानी मामले, जमानती फौजदारी केस, श्रम विवाद, भूमि अधिग्रहण से जुड़े प्रकरण, बिजली-पानी बिल संबंधी विवाद, राजस्व मामले तथा अन्य छोटे-मोटे वाद शामिल हैं। ऐसे कई मामले जो लंबे समय से अदालतों में लंबित हैं, उन्हें आपसी सहमति के आधार पर एक ही दिन में सुलझाने का प्रयास किया जाएगा।
लोक अदालत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें निर्णय दोनों पक्षों की सहमति से होता है, जिससे विवाद का स्थायी समाधान संभव हो पाता है। इसके अतिरिक्त, लोक अदालत में सुलझाए गए मामलों में अपील का प्रावधान नहीं होता, जिससे समय और संसाधनों की बचत होती है। कई मामलों में न्यायालय शुल्क भी वापस कर दिया जाता है, जो आम नागरिकों के लिए एक अतिरिक्त राहत का कारण बनता है।
सीजेएम राकेश कादियान ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि जिनके मामले न्यायालयों में लंबित हैं, वे इस अवसर का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। लोक अदालत की प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और समयबद्ध होती है। उन्होंने बताया कि संबंधित पक्ष अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से या सीधे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से संपर्क कर अपने मामलों को लोक अदालत में सूचीबद्ध करवा सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, लोक अदालतें न केवल न्यायालयों के लंबित मामलों की संख्या कम करने में सहायक होती हैं, बल्कि समाज में सौहार्द और पारस्परिक समझ को भी बढ़ावा देती हैं। पारिवारिक और दीवानी मामलों में समझौते के माध्यम से समाधान निकलने से रिश्तों में कटुता कम होती है और भविष्य के विवादों की संभावना भी घटती है।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्तर पर समय-समय पर आयोजित की जाने वाली लोक अदालतें न्याय प्रणाली को अधिक जनोन्मुखी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। गुरुग्राम में 14 मार्च को आयोजित होने वाली यह राष्ट्रीय लोक अदालत भी उसी प्रयास की एक कड़ी है, जो न्याय को केवल अदालत की चारदीवारी तक सीमित न रखकर जनसुलभ बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने नागरिकों से आह्वान किया है कि वे आगे आएं, आपसी संवाद से समाधान चुनें और लंबित मामलों को समाप्त कर नई शुरुआत करें। 14 मार्च का दिन उन लोगों के लिए विशेष अवसर बन सकता है, जो वर्षों से अपने मामलों के निपटारे की प्रतीक्षा कर रहे हैं।




