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Reporter: Pardeep Narula
Author: Pardeep Narula
गुरुग्राम, 19 फरवरी 2026।
ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित सरस आजीविका मेला 2026 इस वर्ष विविधता, परंपरा और आत्मनिर्भरता का जीवंत उत्सव बनकर उभरा है। मेले में देश के विभिन्न राज्यों के साथ इस बार दादरा नगर हवेली और दमनदीव की पहली भागीदारी विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। पहली बार शामिल हुए इन केंद्र शासित प्रदेशों के कारीगर अपनी पारंपरिक कला और हस्तनिर्मित उत्पादों के जरिए आगंतुकों का ध्यान खींच रहे हैं।

दादरा नगर हवेली और दमनदीव की स्टॉल पर पर्यावरण अनुकूल और हस्तनिर्मित उत्पादों की खास श्रृंखला प्रदर्शित की गई है। यहां वॉल पेंटिंग आर्ट, स्टाइलिश मोबाइल स्टैंड, बांस से बने उपयोगी व सजावटी सामान, पेन बॉक्स, बांस आधारित क्राफ्ट आइटम, होम डेकोर सामग्री, फ्लावर पॉट और आकर्षक हस्तनिर्मित लैम्प उपलब्ध हैं। प्राकृतिक संसाधनों से तैयार ये उत्पाद न केवल उपयोगी हैं बल्कि आधुनिक जीवनशैली के अनुरूप डिजाइन भी प्रस्तुत करते हैं। पर्यावरण के प्रति जागरूकता और हस्तकला की सादगी का संगम इन वस्तुओं में स्पष्ट झलकता है।

मेले में पहुंचने वाले दर्शक इन स्टॉलों पर विशेष रुचि दिखा रहे हैं। पहली बार लगी इन स्टॉलों के प्रति उत्सुकता साफ दिखाई दे रही है। बड़ी संख्या में लोग उत्पादों की जानकारी लेने के साथ खरीदारी भी कर रहे हैं, जिससे कारीगरों में उत्साह और आत्मविश्वास का माहौल है। कई आगंतुकों ने बताया कि प्राकृतिक और टिकाऊ उत्पादों की बढ़ती मांग के बीच ऐसे प्रयास स्थानीय कारीगरों के लिए नए अवसर खोल रहे हैं।
इसी क्रम में उत्तराखंड की स्टॉल भी पारंपरिक और प्राकृतिक उत्पादों के कारण चर्चा में है। यहां मखाने से तैयार हेल्दी स्वीट्स, पारंपरिक लड्डू, विशेष चिवड़ा डिश, मिल्क केक, पारंपरिक अचार, शुद्ध देसी घी और वन शहद उपलब्ध हैं। फलों से तैयार ताजे जूस और अन्य प्राकृतिक खाद्य पदार्थ भी लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। पारंपरिक विधि से तैयार इन उत्पादों की शुद्धता और स्वाद ने आगंतुकों का विश्वास जीता है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ता इन विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे स्टॉल पर लगातार भीड़ बनी हुई है।

मेले की भव्यता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यहां लगभग 450 स्टॉल स्थापित की गई हैं। इन स्टॉलों पर करीब 900 स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं अपने उत्पादों के साथ उपस्थित हैं। ग्रामीण परंपराओं से सुसज्जित परिधान, आत्मविश्वास से भरी मुस्कान और सशक्तिकरण की भावना इस आयोजन को विशेष आयाम दे रही है। ये महिलाएं केवल उत्पादों की बिक्री तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अपनी संघर्ष और सफलता की प्रेरक कहानियां भी साझा कर रही हैं।
हर स्टॉल के पीछे आत्मनिर्भरता की एक कहानी है, जिसमें मेहनत, कौशल और सामूहिक प्रयास का योगदान है। यह मेला केवल व्यापारिक गतिविधियों का मंच नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और सामाजिक बदलाव का प्रतीक बनकर सामने आया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय की पहल से आयोजित यह आयोजन स्थानीय कला, पारंपरिक उत्पादों और महिला उद्यमिता को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें: 9817619376, 9289841801।




