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Reporter: Pardeep Narula
Author: Pardeep Narula
Fortis Hospital Manesar ने क्षेत्र में पहली बार माको (MAKO) रोबोटिक-आर्म असिस्टेड नी रिप्लेसमेंट सर्जरी की सुविधा शुरू की है, जिससे जटिल ऑर्थोपिडिक रोगों के इलाज में नई संभावनाएं खुली हैं। यह उन्नत तकनीक खासकर उन मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है जो लंबे समय से घुटनों के पुराने दर्द और सीमित गतिशीलता से जूझ रहे थे।

माको तकनीक एडवांस 3डी सीटी-आधारित प्री-सर्जिकल प्लानिंग पर आधारित है, जो सर्जन को प्रत्येक मरीज की शारीरिक संरचना के अनुसार सर्जरी को कस्टमाइज़ करने में मदद करती है। रोबोटिक-आर्म की सटीकता से इम्प्लांट सही ढंग से लगाया जाता है, स्वस्थ हड्डी और सॉफ्ट टिश्यू सुरक्षित रहते हैं तथा ऑपरेशन के बाद दर्द कम और रिकवरी तेज होती है।
अस्पताल ने कई जटिल मामलों में सफलता हासिल की है। 68 वर्षीय आशा देशवाल, 69 वर्षीय नीलम भयाना और 69 वर्षीय राधिया देवी जैसी मरीजों ने बाइलेटरल रोबोटिक टोटल नी रिप्लेसमेंट के बाद जल्दी ही चलना-फिरना शुरू कर दिया और आत्मनिर्भर जीवन की ओर लौट सकीं। 61 वर्षीय संतोष और 74 वर्षीय प्रेम चंद पाहवा, जो एडवांस ऑस्टियोआर्थराइटिस और बो-लेग डिफॉर्मिटी से पीड़ित थे, सर्जरी के बाद सीधे खड़े होकर चलने में सक्षम हो गए हैं।
डॉ. रोहित लांबा, डायरेक्टर – ऑर्थोपिडिक्स, ने बताया कि भारत में ऑस्टियोपोरोसिस और बोन डीजेनरेशन की समस्या बढ़ रही है, खासकर महिलाओं में। ऐसे में रोबोटिक-असिस्टेड जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी अधिक सटीक और सुरक्षित विकल्प प्रदान करती है। फैसिलिटी डायरेक्टर अभिजीत सिंह के अनुसार, अब क्षेत्र के मरीजों को उन्नत इलाज के लिए बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि विश्वस्तरीय सुविधा मानेसर में ही उपलब्ध है।




