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Reporter: Pardeep Narula
Auhtor: Pardeep Narula
गुरुग्राम। सेक्टर-31 स्थित रायन इंटरनेशनल स्कूल में विद्यार्थियों के भीतर प्रकृति, पौधों और पक्षियों के प्रति प्रेम व जिम्मेदारी की भावना विकसित करने के उद्देश्य से नवकल्प फाउंडेशन द्वारा विशेष प्रकृति जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के जरिए फाउंडेशन के “दाना-पानी व नेस्ट अभियान” की शुरुआत की गई। इस अभियान के तहत बच्चों को बेजुबान पक्षियों के लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करने और उनकी देखभाल करने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।

जागरूकता से ही बचेगा पर्यावरण
कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण कार्यकर्ता मीनाक्षी सक्सेना ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण पक्षियों के प्राकृतिक आवास लगातार खत्म हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि यदि लोग अपनी बालकनी, छत या आसपास के स्थानों पर पक्षियों के लिए दाना और पानी रखें, तो यह उनके जीवन को बचाने में बड़ी मदद कर सकता है। साथ ही बदलते मौसम में पक्षियों को पानी और सुरक्षित आश्रय की जरूरत के बारे में भी विद्यार्थियों को जागरूक किया गया।
विद्यार्थियों ने तैयार किए ‘नेस्ट’
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों में काफी उत्साह देखने को मिला। छात्र स्वर्णा, समर्थ, अंगया, अधिवक और हिमांशी ने अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इन विद्यार्थियों ने पक्षियों के लिए सुरक्षित घोंसले (नेस्ट) बनाने की तकनीक सीखी और उन्हें स्कूल परिसर के विभिन्न स्थानों पर लगाया। इसके साथ ही पक्षियों के लिए दाना-पानी के पात्र भी रखे गए और उनकी नियमित देखभाल करने का संकल्प लिया गया।
प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश
इस अवसर पर स्कूल की प्रधानाचार्या डॉ. मोनिका मेहता ने मुख्य अतिथि मीनाक्षी सक्सेना को पौधा भेंट कर सम्मानित किया। डॉ. मेहता ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल बच्चों को पढ़ाना ही नहीं, बल्कि उन्हें संवेदनशील और जिम्मेदार नागरिक बनाना भी है। उन्होंने कहा कि बच्चों के भीतर प्रकृति के प्रति यह सम्मान और प्रतिबद्धता भविष्य में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
सामूहिक प्रयास से बदलेगी तस्वीर
कार्यक्रम के अंत में नवकल्प फाउंडेशन की ओर से संदेश दिया गया कि पर्यावरण संरक्षण केवल बातों तक सीमित न रहकर व्यवहार में भी दिखाई देना चाहिए। फाउंडेशन ने अपील की कि यदि हर विद्यार्थी अपने घर या आसपास कम से कम एक घोंसला लगाए और पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करे, तो शहरों में फिर से पक्षियों की चहचहाहट लौट सकती है। यह जागरूकता सत्र विद्यार्थियों के लिए बेहद प्रेरणादायक साबित हुआ और उन्हें प्रकृति का सच्चा प्रहरी बनने की दिशा में प्रेरित किया।




