रेलवे फाटक पर लगता है घंटों जाम
सड़कों की हालत बदतर
बिल्डर ने दिखाए थे हकीक़त से परे के सपने, जमीन पर स्थिति अलग
कोई बस स्टैंड नहीं है सोसाइटी के पास, बस पर सफर करने के मॉल तक जाना पड़ता है पैदल
सोसाइटी के बाहर गंदगी के अंबार
गुरुग्राम। गुरुग्राम के सेक्टर 37D में बनी बीपीटीपी शिरीन सोसाइटी के हजारों निवासी आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। द्वारका एक्सप्रेसवे के पास होने का सपना दिखाकर बिल्डर ने करोड़ों के फ्लैट तो बेच दिए, लेकिन हकीकत में यहां रहने वाले लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। कनेक्टिविटी से लेकर सफ़ाई तक, हर मोर्चे पर हालात बदतर हैं। द्वारका एक्सप्रेसवे के नाम पर जो सुनहरे सपने दिखाए गए थे, वे आज सिर्फ़ विज्ञापनों की तस्वीर बनकर रह गए हैं। सोसाइटी के निवासी बताते हैं कि एक्सप्रेसवे पास होने के बावजूद यहां से शहर के बाकी हिस्सों तक पहुंचना बेहद मुश्किल है। सबसे बड़ी परेशानी रेलवे फाटक है, जहां रोज़ाना घंटों लंबा जाम लगता है। सुबह-शाम दफ्तर जाने वाले लोग हों या बच्चे, सभी को इस जाम में फंसकर कीमती समय गंवाना पड़ता है। कई बार एम्बुलेंस और जरूरी सेवाएं भी जाम में अटक जाती हैं, जिससे हालात और गंभीर हो जाते हैं।
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कनेक्टिविटी ही नहीं, सड़कों की हालत भी किसी से छुपी नहीं है। सोसाइटी के आसपास की सड़कें टूटी हुई हैं, जगह-जगह गड्ढे हैं और बारिश के मौसम में जलभराव आम बात हो चुकी है। निवासियों का कहना है कि फ्लैट खरीदते समय बिल्डर ने चौड़ी और बेहतर सड़कों का वादा किया था, लेकिन जमीन पर हालात बिल्कुल उलट हैं। आए दिन वाहन खराब होते हैं, दोपहिया सवार गिरकर घायल हो रहे हैं और पैदल चलना भी जोखिम भरा हो गया है। लोगों का आरोप है कि बिल्डर ने हकीकत से परे सपने दिखाकर फ्लैट बेचे।
पब्लिक ट्रांसपोर्ट की कमी ने भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सोसाइटी के पास न तो कोई बस स्टैंड है और न ही आसान साधन। बस से सफर करने वालों को मॉल तक पैदल जाना पड़ता है, जो बुज़ुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए काफी परेशानी भरा है। इसके अलावा सोसाइटी के बाहर गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। कूड़े के अंबार, बदबू और आवारा जानवरों की वजह से संक्रमण और बीमारियों का खतरा बना रहता है। निवासी लगातार प्रशासन और बिल्डर से शिकायत कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। लोगों की मांग है कि जल्द से जल्द कनेक्टिविटी, सड़क और सफ़ाई की समस्याओं का समाधान किया जाए।



