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गुरुग्राम, 19 जनवरी। हरियाणा लोक प्रशासन संस्थान (हिपा), गुरुग्राम द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के कल्याण, मानसिक स्वास्थ्य तथा आत्महत्या की रोकथाम से संबंधित प्रशिक्षण मॉड्यूल को अंतिम रूप देने के उद्देश्य से दो दिवसीय गहन कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया।
यह अपनी तरह की पहली कार्यशाला थी, जिसका आयोजन मनोज यादव, महानिदेशक, हिपा के कुशल मार्गदर्शन में किया गया। कार्यशाला में छह प्रतिष्ठित विषय विशेषज्ञों—जिनमें एम्स से डॉ. नंद कुमार तथा एनआईटी कुरुक्षेत्र से प्रो. विकास—सहित राज्यभर के कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों के 25 प्राचार्य एवं संकाय सदस्य शामिल हुए। विचार-विमर्श माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों, राष्ट्रीय टास्क फोर्स तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा जारी परामर्शों एवं ढांचे पर आधारित रहा, जिसमें रोकथाम, संवर्धन तथा संस्थान-आधारित रणनीतियों पर विशेष जोर दिया गया।
दोनों दिनों के दौरान प्रतिभागियों ने अकादमिक, मनोवैज्ञानिक, प्रशासनिक एवं नीतिगत हस्तक्षेपों पर केंद्रित गहन मंथन एवं अत्यंत संवादात्मक सत्रों में भाग लिया। चर्चाओं में प्रारंभिक पहचान, सहयोग एवं संकट-प्रतिक्रिया के लिए संस्थागत तंत्र को सुदृढ़ करने तथा परिसरों में देखभाल एवं कल्याण की संस्कृति को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया गया। साथ ही, राज्य के उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रभावी रूप से लागू किए जा सकने वाले स्केलेबल, टिकाऊ एवं संदर्भ-संवेदनशील प्रशिक्षण मॉड्यूल के विकास पर भी विमर्श हुआ।
विशेषज्ञ सुझावों, संरचित समूह चर्चाओं एवं सहमति-निर्माण अभ्यासों के आधार पर तैयार किया गया ड्राफ्ट प्रशिक्षण मॉड्यूल वर्तमान में अंतिम चरण में है। अंतिम रूप दिया गया मॉड्यूल, विस्तृत कार्यान्वयन रणनीतियों, संस्थागत कार्ययोजनाओं तथा प्रशिक्षण रोल-आउट तंत्र के साथ, शीघ्र ही महानिदेशक हिपा द्वारा हरियाणा के उच्च शिक्षा विभाग के सहयोग से जारी किया जाएगा।
यह कार्यशाला राष्ट्रीय निर्देशों को व्यावहारिक, संस्थान-स्तरीय कार्यों में रूपांतरित करने की दिशा में राज्य के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित, समावेशी एवं सहायक शिक्षण वातावरण सृजित करने के प्रति हरियाणा की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करती है।



