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Reporter: Pardeep Narula
Author: Pardeep Narula
गुरुग्राम की प्रशासनिक गलियारों में इस समय एक साफ संदेश गूंज रहा है – ड्यूटी पहले, बाकी सब बाद में। नगर निगम गुरुग्राम ने बिना पूर्व अनुमति मुख्यालय छोड़ने वाले अधिकारियों पर सख्ती दिखाते हुए कड़ा कार्यालय आदेश जारी किया है। यह आदेश सीधे तौर पर निगमायुक्त प्रदीप दहिया की ओर से जारी किया गया है, जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि कोई भी अधिकारी बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के “स्टेशन” नहीं छोड़ेगा।
गुरुग्राम, 23 फरवरी। हाल के दिनों में निगम प्रशासन के संज्ञान में यह बात आई कि कुछ अधिकारी बिना सूचना दिए या पूर्व अनुमति लिए मुख्यालय से बाहर जा रहे थे। इसका असर सीधे तौर पर निगम के कामकाज पर पड़ रहा था। आम जनता से जुड़े मामलों में देरी, फाइलों का लंबित रहना और शिकायतों के समाधान में बाधा जैसी समस्याएं सामने आ रही थीं। प्रशासनिक व्यवस्था की रफ्तार धीमी पड़ने लगी थी, जिससे नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो रही थी।
इन परिस्थितियों को देखते हुए निगमायुक्त ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि सभी अधिकारी मुख्यालय छोड़ने से पहले सक्षम अधिकारी से लिखित या निर्धारित प्रक्रिया के तहत अनुमति प्राप्त करें। आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि कोई अधिकारी बिना अनुमति अनुपस्थित पाया जाता है, तो इसे गंभीर कदाचार माना जाएगा। ऐसे मामलों में संबंधित अधिकारी के खिलाफ सेवा नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। यानी अब “बिना बताए निकल जाना” महज लापरवाही नहीं, बल्कि दंडनीय आचरण की श्रेणी में आएगा।
कार्यालय आदेश में सभी विभागाध्यक्षों और वरिष्ठ अधिकारियों को विशेष रूप से निर्देशित किया गया है कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को इस आदेश की पूरी जानकारी दें। साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि आदेश का कड़ाई से पालन हो। प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय करने और कार्य संस्कृति में अनुशासन लाने के लिए इसे जरूरी कदम बताया जा रहा है।
निगम प्रशासन का मानना है कि इस निर्णय से अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी और कार्यों के निष्पादन में पारदर्शिता बढ़ेगी। जब अधिकारी अपने निर्धारित स्टेशन पर उपलब्ध रहेंगे, तो जनता से जुड़े कार्यों का निपटारा भी तेज गति से हो सकेगा। शिकायतों का समाधान समय पर होगा और नागरिकों को बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
स्पष्ट है कि यह आदेश केवल अनुशासन लागू करने के लिए नहीं, बल्कि प्रशासनिक दक्षता को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया कदम है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इस सख्ती का जमीनी स्तर पर कितना असर पड़ता है, लेकिन फिलहाल संदेश साफ है – ड्यूटी के समय स्टेशन छोड़ना अब आसान नहीं रहेगा।




