गुरुग्राम, 16 फरवरी 2026।
ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित सरस आजीविका मेला 2026 इन दिनों गुरुग्राम में आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। देश के कोने-कोने से आईं महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्याएं अपने हस्तनिर्मित और पारंपरिक उत्पादों के साथ न केवल बाजार सजा रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की कहानी भी बुन रही हैं। मेले में उमड़ रही भीड़ यह साबित कर रही है कि देसी स्वाद और स्वदेशी हुनर की चमक आज भी बरकरार है।

हरियाणा की स्टॉल्स पर इस बार बिलोना विधि से तैयार गिर गाय का घी लोगों की पहली पसंद बनकर उभरा है। इसके साथ ही चुकंदर का गुड़, देसी शक्कर, देसी खंड और केसर की मांग लगातार बढ़ रही है। कश्मीर का सफेद शहद, चुकंदर और गाजर का अचार, इलायची और सौंफ मिश्रित रोस्टेड नमकीन तथा राख से निर्मित पारंपरिक बर्तन भी खरीदारों को आकर्षित कर रहे हैं। इन उत्पादों में स्वाद के साथ-साथ सेहत और परंपरा का संतुलन दिखाई देता है।
सौंदर्य और आस्था से जुड़े उत्पाद भी मेले की रौनक बढ़ा रहे हैं। प्राकृतिक परफ्यूम, नेचुरल अगरबत्तियां, तुलसी की माला, कान्हा जी के वस्त्र और गोटा-पट्टी से सजी हरियाणवी ड्रेस महिलाओं और युवतियों के बीच खासे लोकप्रिय हैं। वस्त्रों के सेक्शन में जामदानी, चंदेरी, मलमल, तसर, कलमकारी, जूट सिल्क और बांसवाड़ा कॉटन की साड़ियां खरीददारों को अपनी ओर खींच रही हैं। दरी पर उकेरे गए पारंपरिक डिजाइनों ने भी कला प्रेमियों का ध्यान आकर्षित किया है।

उत्तर प्रदेश से आईं “पढ़ी-लिखी चूड़ियां” इस बार चर्चा का विषय बनी हुई हैं। स्टॉल संचालिका दिलकश के अनुसार इन चूड़ियों की खासियत यह है कि ये कपड़ों में उलझती नहीं हैं, इनमें आवाज नहीं होती और ये लंबे समय तक सुरक्षित रहती हैं। मोतियों से सुसज्जित इन चूड़ियों को उनके विशेष डिजाइन के कारण ‘पढ़ी-लिखी’ नाम दिया गया है। महिलाओं में इनकी अच्छी खासी मांग देखी जा रही है।

गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए मध्य प्रदेश की शकुंतला गर्ग द्वारा तैयार पारंपरिक शरबत मेले में शीतल आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। उनके स्टॉल पर लेमन अष्टामृत, आंवला रस, नींबू-अदरक शरबत, काजू-बादाम-पिस्ता मिश्रित नेचुरल ठंडाई, जलजीरा मसाला, सौंफ शरबत, शाही गुलाब, शाही पान, केसर-बादाम और राजभोग शरबत उपलब्ध हैं। इन पेयों की ताजगी भरी सुगंध और स्वाद लोगों को बार-बार स्टॉल तक खींच ला रही है। इसके अतिरिक्त मध्य प्रदेश की खादी कुर्तियां भी खरीदारों के बीच लोकप्रिय बनी हुई हैं।

मेले में देश के विभिन्न राज्यों से आए इन हस्तनिर्मित उत्पादों ने न केवल पारंपरिक कला को नई पहचान दी है, बल्कि ग्रामीण स्वावलंबन और महिला सशक्तिकरण को भी मजबूती प्रदान की है। सरस आजीविका मेला 2026 वास्तव में हुनर, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का जीवंत उत्सव बन गया है, जहां हर स्टॉल एक कहानी कहता है और हर खरीदारी एक सपने को आगे बढ़ाती है।



