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Reporter: Pardeep Narula
Author: Pardeep Narula
गुरुग्राम, 20 फरवरी 2026।
ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित सरस आजीविका मेला 2026 इस वर्ष ग्रामीण कला, पारंपरिक शिल्प और स्वदेशी उत्पादों का जीवंत उत्सव बनकर उभरा है। देश के विभिन्न राज्यों से आए स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने अपने हुनर से मेले को रंगों, खुशबुओं और सुरों से भर दिया है। परिधानों से लेकर हस्तशिल्प और पारंपरिक खाद्य उत्पादों तक, हर स्टॉल ग्रामीण भारत की कहानी कहती नजर आ रही है।

चंदेरी और महेश्वरी साड़ियों का जलवा
मध्यप्रदेश की स्टॉल इस बार खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। यहां की चंदेरी साड़ियां और महेश्वरी साड़ियां अपनी हल्की बनावट, प्राकृतिक रंगों और हैंडलूम तकनीक के कारण खूब पसंद की जा रही हैं। प्लेन साड़ी को तैयार करने में जहां 1 से 2 दिन का समय लगता है, वहीं प्रिंटेड और बॉर्डर वाली साड़ियों को लगभग 3 दिन में तैयार किया जाता है।

कॉटन साड़ी, महेश्वरी सिल्क, डोला सिल्क और चंदेरी सूट जैसे विकल्प भी उपलब्ध हैं। मल्टीकलर वैरायटी में सजी ये साड़ियां गर्मी और सर्दी दोनों मौसम में आरामदायक मानी जाती हैं। स्टॉल संचालकों के अनुसार, मेले में इनकी मांग लगातार बढ़ रही है।
खादी की कुर्तियां भी लोगों को आकर्षित कर रही हैं। सिंपल, अनारकली और अन्य डिजाइनों में उपलब्ध इन कुर्तियों पर हैंडलूम कढ़ाई की गई है। खास तौर पर गर्मी के मौसम को ध्यान में रखकर तैयार किए गए इन परिधानों को युवतियों और महिलाओं की अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है।
Karan Randhawa ने बांधा समां
मेले की सांस्कृतिक संध्या में प्रसिद्ध पंजाबी गायक Karan Randhawa ने अपनी दमदार प्रस्तुति से माहौल को ऊर्जा से भर दिया। उन्होंने अपने लोकप्रिय गीत Phulkari और Na Sun Mitran Da सहित कई हिट गानों की प्रस्तुति दी। जैसे ही संगीत की धुन गूंजी, पूरा पंडाल तालियों और उत्साह से गूंज उठा। युवा, बच्चे और परिवार सभी उनके गीतों पर झूमते नजर आए। कलाकार की मंच उपस्थिति और दर्शकों से संवाद ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
छत्तीसगढ़ के अचार और डोकरा आर्ट की धूम
छत्तीसगढ़ की स्टॉल पर पारंपरिक अचारों की खास मांग देखी जा रही है। कड़ी पत्ते का अचार विशेष आकर्षण बना हुआ है, जबकि टमाटर, अदरक और काबुली चने के अचार की भी अच्छी बिक्री हो रही है। दालें, राजमा और जड़ी-बूटियां पारंपरिक विधि से तैयार की गई हैं, जिनकी शुद्धता और स्वाद लोगों को लुभा रहे हैं।इसके साथ ही छत्तीसगढ़ की प्राचीन डोकरा आर्ट भी लोगों का ध्यान खींच रही है। लगभग 4000 वर्ष पुरानी इस धातु शिल्प परंपरा में देवी-देवताओं की मूर्तियां, होम डेकोर आइटम और सजावटी सामग्री प्रदर्शित की गई है। स्थानीय कलाकारों के अनुसार, यह कला पीढ़ी दर पीढ़ी संरक्षित रही है और आज भी अपनी मौलिकता से लोगों को आकर्षित कर रही है।
कुल मिलाकर, सरस आजीविका मेला 2026 ग्रामीण परंपरा, स्वदेशी उत्पाद और सांस्कृतिक विविधता का ऐसा संगम बन गया है, जो न केवल खरीदारी का अवसर देता है बल्कि भारत की समृद्ध विरासत से रूबरू भी कराता है।




