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गुरुग्राम, 15 सितंबर। खांडसा श्मशानघाट विवाद में अब भी भीमसेना भी कूद गई। भीमसेना ने चेतावनी देते हुए कहा है कि कोई भी इसकी ईंट भी नहीं उखाड़ सकता। श्मशानघाट की जमीन पर कब्जा लेने के लिए शनिवार और रविवार को निगम की टीम यहां पहुंची थी। लेकिन नगर निगम की टीम को ग्रामीणों ने बैरंग लौटा दिया था। इस मामले में आज कोर्ट में भी सुनवाई है।
इस बीच भीमसेना प्रमुख सतपाल तंवर ग्रामीणों के साथ खांडसा के श्मशान घाट पहुंचे। खांडसा के रहने वाले भीम सेना प्रमुख नवाब सतपाल तंवर ने कहा कि श्मशानघाट की एक ईंट भी नहीं हटने दी जाएगी, चाहे इसके लिए हमें अपनी जान की कुर्बानी क्यों न देनी पड़े। अब इस मामले में खांडसा गांव को पार्टी बनाने और पूर्व में दिए आदेश को लेकर ग्रामीणों ने भी कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। श्मशान पर कब्जे पर स्टे काे लेकर आज कोर्ट में सुनवाई होगी।
सतपाल तंवर ने बताया कि नगर निगम अधिकारियों ने शनिवार और रविवार को श्मशान घाट को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन भीम सेना और स्थानीय ग्रामीणों के कड़े विरोध के बाद प्रशासन को कार्रवाई रोकनी पड़ी। कोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए अधिकारी पटवारी और तहसीलदार को साथ लेकर पैमाइश करने पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि कैबिनेट मंत्री राव नरबीर सिंह और जीएमडीए के डीटीपी आरएस बाठ कथित तौर पर सख्त कार्रवाई करने वाले थे। जिस पर ग्रामीणों ने श्मशान को बचाने के लिए एकजुट होकर विरोध शुरू कर दिया।
गुरुग्राम में खांडसा गांव के श्मशान की जमीन करोड़ों रुपये की है। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ लोगों की नजर इस जमीन पर है।
श्मशान घाट पर ही बुलाई पंचायत
सतपाल तंवर सहित ग्रामीणों और क्षेत्र के पार्षद अवनीश राघव उर्फ रिंकू ने श्मशान घाट पर ही पंचायत बुलाई। इस दौरान तंवर ने प्रशासन को दो टूक चेतावनी दी कि श्मशान घाट को किसी भी कीमत पर नहीं तोड़ने नहीं दिया जाएगा। हालांकि भीम सेना के आक्रामक रुख और ग्रामीणों के विरोध के चलते प्रशासन की टीम फिलहाल बैरंग लौट गई, लेकिन जीएमडीए और एमसीजी के अधिकारी इस मुद्दे पर आगे की रणनीति तय करने के लिए विचार-विमर्श कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यह श्मशानघाट उनके लिए धार्मिक, आस्था और जन भावनाओं के महत्व का स्थान है। इसे तोड़ना उनकी भावनाओं पर चोट है। सालों से वे यहां पर संस्कार करते आ रहे हैं। लोगों का कहना है कि श्मशानघाट की यह जमीन बेशकीमती है, जिस पर कुछ लोगों की नजर है, लेकिन ग्रामीण इस पर अनधिकृत कब्जा नहीं होने देंगे।
यहां के पार्षद अवनीश राघव का कहना है कि हाईवे बनाने के लिए सालों पहले एनएचएआई द्वारा यहां के जमीन मालिकों को मुआवजा दिया जा चुका है। अब कुछ लोग मुआवजा लेने के बाद श्मशानघाट में अपनी जमीन बता रहे हैं। इसको लेकर नगर निगम के खिलाफ एक व्यक्ति ने केस भी किया था। जो निगम द्वारा सही पैरवी नहीं की गई, जिसके कारण कोर्ट ने कब्जा दिलाने को कहा। अब गांव को पार्टी बनाने और स्टे की एप्लिकेशन लगाई गई है। जिसकी आज कोर्ट में सुनवाई है।




