गुरुग्राम, 18 फरवरी।
सोशल मीडिया और डिजिटल लेनदेन के बढ़ते दौर में साइबर धोखाधड़ी के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। इस पर चिंता व्यक्त करते हुए गुरुग्राम के उपायुक्त अजय कुमार ने जिलावासियों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की साइबर धोखाधड़ी का शिकार होने पर तुरंत केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा संचालित हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें।
डीसी ने कहा कि बीते कुछ वर्षों में ऑनलाइन शॉपिंग का चलन तेजी से बढ़ा है। लोग आकर्षक ऑफर, भारी छूट, लॉटरी और इनामी विज्ञापनों के झांसे में आसानी से आ जाते हैं। साइबर अपराधी इन्हीं कमजोरियों का फायदा उठाकर लोगों की बैंकिंग और व्यक्तिगत जानकारी हासिल कर लेते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी वेबसाइट या ऐप से खरीदारी करने से पहले उसकी विश्वसनीयता अवश्य जांच लें। वेबसाइट के यूआरएल, सिक्योरिटी सर्टिफिकेट और रिव्यू की जांच करना बेहद जरूरी है।

उन्होंने सुझाव दिया कि यदि संभव हो तो ऑनलाइन खरीदारी करते समय ‘कैश ऑन डिलीवरी’ का विकल्प चुनें। इससे बैंक खाते और डेबिट या क्रेडिट कार्ड की गोपनीय जानकारी साझा करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और धोखाधड़ी की आशंका कम होगी। डीसी ने कहा कि कई बार छोटी सी लापरवाही बड़ी आर्थिक हानि का कारण बन जाती है।
उपायुक्त ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर वित्तीय धोखाधड़ी हो जाती है तो उसे घबराने की बजाय तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना चाहिए। यह हेल्पलाइन त्वरित कार्रवाई के लिए बनाई गई है ताकि संबंधित बैंकिंग ट्रांजेक्शन को समय रहते रोका जा सके। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध के मामलों में समय ही सबसे महत्वपूर्ण तत्व होता है। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, उतनी ही जल्दी पीड़ित को राहत मिलने की संभावना बढ़ जाती है।
डीसी ने यह भी जानकारी दी कि पहले साइबर फ्रॉड की सूचना के लिए 155260 हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध था, लेकिन अब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उसकी जगह 1930 नंबर जारी किया है। इसलिए आमजन इस नए नंबर को याद रखें और अपने परिवार, मित्रों तथा परिचितों को भी इसकी जानकारी दें।
उन्होंने युवाओं से विशेष अपील करते हुए कहा कि वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा की जाने वाली किसी भी संदिग्ध लिंक या ऑफर पर क्लिक करने से पहले सतर्क रहें। फर्जी कॉल, केवाईसी अपडेट, बैंक खाते बंद होने की धमकी, इनाम जीतने का दावा या नौकरी का झांसा—ये सभी साइबर ठगी के आम तरीके हैं। ऐसे मामलों में कोई भी निजी जानकारी, ओटीपी या बैंक विवरण साझा न करें।
उपायुक्त ने बताया कि पारंपरिक तरीके से पुलिस स्टेशन जाकर एफआईआर दर्ज कराना और उसकी जांच प्रक्रिया समय लेने वाली हो सकती है। हालांकि यह भी आवश्यक प्रक्रिया है, लेकिन तत्काल आर्थिक नुकसान को रोकने के लिए हेल्पलाइन 1930 सबसे प्रभावी माध्यम है। इसके अलावा पीड़ित व्यक्ति राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल www.cybercrime.gov.in� पर भी अपनी शिकायत ऑनलाइन दर्ज करा सकता है।
उन्होंने कहा कि साइबर अपराध से बचाव के लिए जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। परिवार के बुजुर्गों और बच्चों को भी डिजिटल सुरक्षा के बारे में जानकारी देना आवश्यक है। डीसी ने नागरिकों से अपील की कि वे अफवाहों या आकर्षक लालच में न आएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना संबंधित अधिकारियों को दें।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि साइबर अपराध के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है, लेकिन नागरिकों की सतर्कता और सहयोग से ही इन घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।



