District Legal Services Authority गुरुग्राम ने जिला कारागार भोंडसी में लगाई जेल लोक अदालत, तीन विचाराधीन बंदियों को मिली रिहाई !
गुरुग्राम, 18 फरवरी। न्याय की धीमी चलती घड़ी को थोड़ा तेज करने की कोशिश में आज जिला कारागार भोंडसी के भीतर एक अहम पहल की गई। हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन और अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष वाणी गोपाल शर्मा के दिशा-निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण गुरुग्राम की ओर से जेल लोक अदालत का आयोजन किया गया। इस विशेष पहल का उद्देश्य विचाराधीन बंदियों के मामलों का त्वरित निपटारा कर उन्हें समयबद्ध न्याय दिलाना रहा।

जेल परिसर में आयोजित इस लोक अदालत के दौरान तीन विचाराधीन बंदियों को राहत मिली और उन्हें रिहा किया गया। यह कदम उन बंदियों के लिए उम्मीद की किरण साबित हुआ, जिनके मामले लंबे समय से लंबित थे।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव राकेश कादियान ने स्वयं जेल का निरीक्षण किया और बंदियों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जेल लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य ऐसे मामलों को प्राथमिकता देना है, जिनमें कानूनी प्रक्रिया की देरी के कारण बंदी लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
निरीक्षण के दौरान सचिव ने जेल में संचालित लीगल ऐड क्लिनिक का भी अवलोकन किया। उन्होंने बंदियों को बताया कि वे प्रार्थना-पत्र के माध्यम से मुफ्त अधिवक्ता की सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही यह भी जानकारी दी गई कि किसी भी प्रकार की कानूनी सहायता के लिए आपातकालीन राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 15100 पर कॉल कर घर बैठे निःशुल्क विधिक परामर्श लिया जा सकता है।
सचिव राकेश कादियान ने जेल प्रशासन को निर्देश दिए कि बंदियों की मुलाकात व्यवस्था, महिला बंदियों की विशेष आवश्यकताओं, चिकित्सीय सुविधाओं, स्वच्छता, खान-पान, साक्षरता और खेलकूद जैसी व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि जेल केवल सजा का स्थान नहीं, बल्कि सुधार और पुनर्वास की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण संस्थान है।
कार्यक्रम के दौरान जेल अधीक्षक, उप अधीक्षक, जेल स्टाफ, पैनल अधिवक्ता तथा विधिक सेवा प्राधिकरण से जुड़े अन्य अधिकारी और अधिवक्ता उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर यह संदेश देने का प्रयास किया कि न्याय तक पहुंच हर नागरिक का अधिकार है, चाहे वह किसी भी परिस्थिति में क्यों न हो।
जेल लोक अदालत का यह आयोजन न केवल लंबित मामलों के निपटारे की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है, बल्कि इससे बंदियों में भी न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास मजबूत होने की उम्मीद है। प्रशासन का मानना है कि ऐसे आयोजनों से न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आएगी और पात्र बंदियों को समय रहते राहत मिल सकेगी।



