Bilkul Sateek News
Reporter: Pardeep Narula
Author: Pardeep Narula
गुरुग्राम की सड़कों पर शुक्रवार रात जो हुआ, उसने ट्रैफिक नियमों से ज्यादा इंसानियत पर सवाल खड़े कर दिए।
मेदांता से घर… और बीच रास्ते हिंसा

21 फरवरी की देर रात, रिटायर्ड कर्नल अनिल यादव अपने बीमार पिता की देखभाल कर Medanta Hospital से घर लौट रहे थे। सेक्टर-50 थाना क्षेत्र में उनकी कार दाईं लेन में चल रही एक दूसरी कार से हल्के से टकरा गई। वजह बताई जा रही है कि दूसरी कार अचानक बाईं ओर मुड़ गई। ब्रेक लगाने के बावजूद टक्कर टाली नहीं जा सकी।
एक फौजी के स्वभाव के मुताबिक कर्नल यादव कार से उतरे, नुकसान का जायजा लिया और मामूली क्षति की भरपाई के लिए तैयार भी हो गए। लेकिन सामने वाले वाहन से छह युवक बीयर की बोतलें लेकर उतरे, और माहौल बातचीत से सीधे हिंसा में बदल गया।

बहस से बर्बरता तक
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पहले तीखी बहस हुई, फिर युवकों ने कर्नल पर बीयर की बोतलों और लात-घूंसों से हमला कर दिया। उनकी कार का विंडस्क्रीन और लाइट्स तोड़ दिए गए। आरोप है कि हमलावरों ने उन्हें जबरन अपनी ही कार में धकेलने की कोशिश की, मानो कहीं और ले जाने का इरादा हो। लेकिन वे कार स्टार्ट नहीं कर सके और योजना विफल हो गई।
जैसे ही ट्रैफिक बढ़ा और राहगीर इकट्ठा होने लगे, आरोपी मौके से फरार हो गए। जाते-जाते कथित तौर पर नकदी भी छीन ली गई। घायल कर्नल को तुरंत अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों के अनुसार उन्हें गंभीर चोटें आई हैं, हालांकि फिलहाल वे खतरे से बाहर हैं।
सोशल मीडिया पर गुहार
इस घटना के बाद कर्नल रोहित देव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर विस्तृत पोस्ट साझा कर प्रशासन को टैग किया। उन्होंने Gurugram Police से लेकर PMO India तक को संबोधित करते हुए त्वरित कार्रवाई की मांग की।
पोस्ट में आरोप लगाया गया कि सेक्टर-50 थाने की जांच अधिकारी अब तक अस्पताल पहुंचकर बयान दर्ज करने नहीं आईं। साथ ही यह भी कहा गया कि बिना पूरी जांच के यह मान लिया गया कि कर्नल ने ही पहले मारपीट की और चले गए। इस कथित लापरवाही पर सवाल उठाए गए हैं।
पूर्व सैनिकों में नाराज़गी
घटना के बाद पूर्व सैनिक समुदाय में आक्रोश देखा गया। उनका कहना है कि जिन्होंने दशकों तक देश की सेवा की, उनकी सुरक्षा सड़कों पर भी सुनिश्चित होनी चाहिए। रोडरेज की बढ़ती घटनाएं शहर के ट्रैफिक अनुशासन और कानून व्यवस्था दोनों के लिए चेतावनी हैं।
पुलिस का पक्ष
सेक्टर-50 थाने के एसएचओ ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है और आरोपियों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी की जाएगी। वहीं स्थानीय राजनीतिक पदाधिकारियों ने भी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
गुरुग्राम, जो कॉरपोरेट टावरों और तेज रफ्तार जीवनशैली के लिए जाना जाता है, उस रात एक और तस्वीर दिखा गया। सड़कें सिर्फ डामर की नहीं होतीं, वे हमारे व्यवहार का आईना भी होती हैं। सवाल अब सिर्फ एक हादसे का नहीं, बल्कि उस गुस्से का है जो मामूली टक्कर को भी जंग में बदल देता है।




