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फरीदाबाद (अजय वर्मा), 18 जनवरी। भारत ऐतिहासिक जनसांख्यिकीय संक्रमण से गुजर रहा है, जिसमें 2036 तक वरिष्ठ नागरिकों की संख्या 230 मिलियन और 2050 तक 320 मिलियन पार करने का अनुमान है। वृद्धावस्था के लिए व्यापक, अधिकार-आधारित और शासन-केंद्रित रणनीतियों की आवश्यकता अब राष्ट्रीय प्राथमिकता बन गई है। इसे ध्यान में रखते हुए मानव रचना विश्वविद्यालय ने दक्ष फाउंडेशन के सहयोग से “एजिंग इंडिया: उभरती चुनौतियाँ और समावेशी समाधान” विषय पर सीनियर सिटीजन वेलफेयर 2026 सम्मेलन आयोजित किया। इस राष्ट्रीय सम्मेलन ने वरिष्ठ नागरिक कल्याण को अच्छे शासन, सामाजिक न्याय और समावेशी विकास का केंद्रीय स्तंभ मानते हुए उनके अधिकारों, गरिमा और समाज में सक्रिय भागीदारी पर जोर दिया।
उद्घाटन सत्र में केंद्र सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव हनीफ कुरैशी आईपीएस भी उपस्थित थे। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक ज्ञान और मूल्यों का महत्वपूर्ण भंडार हैं और भारत की युवा पीढ़ियों को उनके मार्गदर्शन की आवश्यकता है, जितना बुज़ुर्गों को सुरक्षा की। उन्होंने नीति-संचालित, समावेशी शासन ढाँचों की आवश्यकता पर जोर दिया, जो वरिष्ठ नागरिकों की गरिमा, सुरक्षा और अंतरपीढ़ी जिम्मेदारी सुनिश्चित करें।
डॉ. आशा वर्मा डीन स्कूल ऑफ लॉ मानव रचना विश्वविद्यालय ने कहा, “वरिष्ठ नागरिकों को समाज अक्सर नजरअंदाज करता है। ये चुनौतियाँ वित्तीय असुरक्षा, अकेलापन, मानसिक स्वास्थ्य, साइबर धोखाधड़ी, संपत्ति विवाद और कानूनी सुरक्षा की कमी जैसी हैं। इस सम्मेलन का उद्देश्य इन वास्तविकताओं को नीति और शासन चर्चा में लाना है। हमारा लक्ष्य परोपकारी समाधानों से आगे बढ़कर अधिकार-आधारित, सम्मानजनक और जवाबदेह ढांचे तैयार करना है, जो बुज़ुर्गों को समाज का अभिन्न हिस्सा मानें। इन विचार-विमर्श का परिणाम राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर वरिष्ठ नागरिक कल्याण को मजबूत करने वाली ठोस नीतिगत सिफारिशों के रूप में सामने आएगा।
ब्रिगेडियर एन एन माथुर मुख्य सलाहकार (एल्डर केयर एवं वेलफेयर) दक्ष फाउंडेशन ने कहा, “हमारी पहल ‘ख़याल अपने बुज़ुर्गों का’ वरिष्ठ नागरिकों के लिए जागरूकता को कार्रवाई में बदलने का प्रयास है। नीति निर्माता, विशेषज्ञ और युवाओं को एक मंच पर लाकर यह सम्मेलन बुज़ुर्गों की गरिमा, शासन और अंतरपीढ़ी संवाद को मजबूत करता है, जिससे वरिष्ठ कल्याण भारत की सामाजिक और नीति प्राथमिकताओं के केंद्र में रहे।
इस अवसर पर दक्ष फाउंडेशन के एवीएम एल एन शर्मा मुख्य सलाहकार (शिक्षा, नैतिकता और मूल्य) भी उपस्थित थे, जिन्होंने बच्चों को बुज़ुर्गों के सम्मान के महत्व को सिखाने और अनुशासन को आत्मसात करने पर जोर दिया।
इसके साथ ही संजय कुंदू आईपीएस मुख्य सलाहकार (शासन और सार्वजनिक सुरक्षा) भी दक्ष फाउंडेशन से उपस्थित थे, जिन्होंने वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल पर केंद्रीय सरकार की नीतियों के पालन और कार्यान्वयन पर अपने विचार साझा किए।
सम्मेलन की चर्चाएँ चार आपस में जुड़े विषयों के इर्द-गिर्द केंद्रित थीं, जो भारत में वरिष्ठ नागरिक कल्याण के मुख्य आयाम हैं। चर्चाओं में सरकारी योजनाओं का मूल्यांकन, कानूनी सुरक्षा, सुरक्षा और न्याय तक पहुंच, वृद्धावस्था स्वास्थ्य, मानसिक कल्याण, पारिवारिक समर्थन और सामाजिक गरिमा जैसे मुद्दे शामिल थे।
लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड : अनुभव और सेवा का सम्मान
सम्मेलन के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान देने वाले वरिष्ठ नागरिकों को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया:
• फ्लाइट लेफ्टिनेंट बलवान सिंह — खेल क्षेत्र
(मुख्य कोच, भारतीय कबड्डी टीम एवं जयपुर पिंक पैंथर्स)
• डॉ. अजय तहलान — स्वास्थ्य सेवाएँ
(पूर्व निदेशक, सेंट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट, कसौली)
• प्रमोद कुमार दत्ता — स्वास्थ्य सेवाएँ
(हेल्थ सेक्टर में दीर्घकालीन योगदान)
• डॉ. जे. सी. डागर — साहित्य (कृषि विज्ञान)
(समाज उत्थान और कृषि विज्ञान के क्षेत्र में योगदान)
• डॉ. करण सिंह ढाका — शिक्षा
(पूर्व एक्साइज एंड टैक्सेशन कमिश्नर; शिक्षा एवं रक्तदान सेवाओं में योगदान)
• आर. एस. यादव — पर्यावरण संरक्षण
(सेवानिवृत्त खनन अधिकारी; पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भूमिका)
• राजकुमार जैन — समाज सेवा
(150 से अधिक सामाजिक परियोजनाओं के सफल संचालन हेतु)
• विनोद मलिक — कला एवं संस्कृति
(फाउंडर प्रेसिडेंट, फरीदाबाद लिटरेरी एंड कल्चरल सेंटर)
• अशोक लवासा, आईएएस (सेवानिवृत्त) — प्रशासनिक सेवाएँ
(पूर्व वित्त सचिव, भारत सरकार एवं पूर्व चुनाव आयुक्त)
• बी. दिवाकर — कानूनी सेवाएँ
(अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट; न्याय एवं विधिक सहायता में योगदान)
सम्मेलन का सार
सम्मेलन में मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक समावेशन, पारिवारिक समर्थन, कानूनी सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ और आयु-मैत्रीपूर्ण बुनियादी ढाँचे जैसे विषयों पर गहन चर्चा हुई। अंतर-पीढ़ी संवाद को विशेष महत्व दिया गया, जिसमें वरिष्ठ नागरिकों को मार्गदर्शक और राष्ट्र निर्माण के सक्रिय भागीदार के रूप में रेखांकित किया गया।



