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गुरुग्राम (मोहित कुमार), 27 नवंबर। साइबर सिटी गुरुग्राम में आज भी यातायात समस्या विकराल रूप धारण किए हुए हैं। एक तो बस अड्डे का नवनिर्माण नहीं होना। दूसरा बसों की संख्या में आए दिन कमी होना। जिस वजह से गुरुग्राम के लोगों के लिए रोजाना सफर करना किसी सजा से कम नहीं है। विशेषतौर पर महिला यात्रियों के लिए तो और भी कष्टकर है। खचाखच भरी बस में शोहदों की घूरती आंखें और अश्लील हकरतें इनसे इन्हें रोज दोचार होना पड़ता है। वहीं, यात्रियों को सामान चोरी और जेबें कटना भी आम हैं।
समाजसेवी राजेश पटेल ने कहा कि गुरुग्राम में सुबह 7 से 9 और शाम 5 से 7 बजे बसों में होने वाले भीड़ किसी भी यात्री के लिए भयावह अनुभव से कम नहीं है। ऐसे में वरिष्ठ नागरिकों और बीमार यात्रियों के लिए बस पर चढ़ना किसी ‘परीक्षा’ से कम नहीं होता। जिसमें वे कई बार गिर कर घायल हो जाते हैं। रोडवेज प्रशासन भी यात्रियों की सुध नहीं ले रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को चाहिए कि दोपहिया वाहनों की छोटी-मोटी गलतियों पर चालान ना काटे जाएं। इससे सार्वजनिक बसों पर यात्रियों का दबाव कम होगा। उन्होंने कहा कि पहले ऐसी भीड़ केवल त्यौहारों पर ही देखने को मिलती थी, आज ऐसा नजारा दिनचर्या का हिस्सा बन गया है।
राजेश पटेल ने यात्रियों की असुविधा को देखते हुए हरियाणा सरकार से आग्रह है कि –
- नई बसों का संचालन बढ़ाया जाए।
- पीक आवर्स में विशेष रूट पर बसें चलाई जाएं।
- महिला सुरक्षा के लिए दिल्ली की तर्ज पर बसों में मार्शल या गार्ड नियुक्ति किए जाएं।
- वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए विशेष सुविधाएं लागू की जाए।
- भीड़भाड़ वाले रूटों पर निगरानी बढ़ाई जाए।
- आम नागरिकों को सुरक्षित और सम्मानजनक यात्रा का अधिकार मिले।




