गुरुग्राम 12 फरवरी 2026।
दिल्ली–गुरुग्राम एक्सप्रेस-वे पर एक बार फिर रफ्तार और लापरवाही ने मिलकर एक जिंदगी निगल ली। सेक्टर 37 थाना क्षेत्र में बिस्टेक बिल्डिंग के पास तेज रफ्तार अज्ञात वाहन की टक्कर से स्कूटी सवार 55 वर्षीय राजेश कुमार खुले नाले में जा गिरे, जहां उनकी मौत हो गई। यह घटना सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि एक्सप्रेस-वे की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल बनकर सामने आई है।

ड्यूटी से लौट रहे थे घर, नहीं पहुंच पाए परिवार तक
फिरोज गांधी कॉलोनी निवासी राजेश कुमार आईएमटी मानेसर स्थित एचएसजी इंडिया लिमिटेड में कार्यरत थे। रोज की तरह बुधवार शाम करीब सात बजे वह स्कूटी से घर लौट रहे थे। पीछे से आए एक अज्ञात वाहन ने उनकी स्कूटी को टक्कर मारी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि वे सड़क किनारे लगी रेलिंग से टकराते हुए सीधे खुले नाले में जा गिरे। राहगीरों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें बाहर निकालकर पारस अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
एक साल में दूसरा मामला, फिर भी नहीं लगे सुरक्षा जाल
दिल्ली–गुरुग्राम एक्सप्रेस-वे के दोनों ओर खुले नाले लंबे समय से खतरे की घंटी बने हुए हैं। करीब एक वर्ष पहले भी इसी तरह नाले में गिरने से एक महिला की जान गई थी। हाईवे पर लोहे की रेलिंग तो लगाई गई है, लेकिन कई स्थानों पर सुरक्षा जाली नहीं है। ऐसे में टक्कर या असंतुलन की स्थिति में वाहन सवार सीधे नाले में जा गिरते हैं। सवाल यह है कि पहले हादसे के बाद भी स्थायी समाधान क्यों नहीं किया गया?
परिवार ने की कार्रवाई की मांग
परिजनों ने अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। हादसे के बाद चालक मौके से फरार हो गया। सेक्टर 37 थाना एसएचओ मंजीत के अनुसार, आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और जल्द ही आरोपी की पहचान कर गिरफ्तारी की जाएगी।
जिम्मेदारी किसकी? यह हादसा सिर्फ एक ड्राइवर की लापरवाही नहीं, बल्कि हाईवे प्रबंधन की खामियों की भी कहानी कहता है। सवाल उठता है कि जब पहले भी ऐसी घटना हो चुकी थी, तो खुले नालों को पूरी तरह सुरक्षित क्यों नहीं किया गया?
जब तक सुरक्षा इंतज़ाम कागजों से निकलकर जमीन पर नहीं उतरेंगे, तब तक एक्सप्रेस-वे रफ्तार का रास्ता नहीं, जोखिम का गलियारा बना रहेगा।



