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गुरुग्राम, 21 जनवरी। गुरुग्राम में देररात तालाब में 12 वर्षीय बच्चे के डूबने के सूचना मिलते ही तुरंत रेस्क्यू टीमें मौके पर पहुंची और बच्चे की तलाश में बोट लेकर पानी में उतर गईं। कुछ देर बाद ‘ऑल क्लियर’ की घोषणा के बाद रेस्क्यू टीमों ने राहत की सांस ली। प्रशासन द्वारा नोएडा जैसे हादसे रोकने के लिए मॉक ड्रिल किया गया था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार गुरुग्राम में नोएडा जैसी दर्दनाक घटना से सबक लेते हुए रेस्क्यू टीमों ने आधी रात के बाद मॉक ड्रिल आयोजित की। पुलिस और फायर ब्रिगेड की रेस्क्यू टीमें रात करीब 1.20 बजे सेक्टर-53 तालाब पर पहुंची और मॉक ड्रिल शुरू किया।
मॉक ड्रिल की शुरुआत तब हुई जब सेक्टर-53 थाना क्षेत्र में एक 12 वर्षीय बच्चे के डूबने की सूचना पुलिस को मिली। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड, पुलिस टीम और एसडीआरएफ (राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल) को तुरंत अलर्ट किया गया। मौके पर पहुंचकर सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। संबंधित तहसीलदार को भी स्थिति की जानकारी दी गई।
हालांकि यह एक नियोजित मॉक ड्रिल थी, जिसका उद्देश्य वास्तविक आपातकाल में त्वरित और समन्वित कार्रवाई का आकलन करना था। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर यह मॉक ड्रिल रात के समय इसलिए आयोजित की गई, क्योंकि डूबने की अधिकांश घटनाएं रात या सुबह के समय होती हैं, जब दृश्यता कम होती है और रेस्क्यू चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
डीसीपी ईस्ट गौरव राजपुरोहित ने बताया कि मॉक ड्रिल सफल रही। नोएडा की घटना में भी घने कोहरे और देरी के कारण मदद नहीं पहुंच पाई थी, जिससे युवा इंजीनियर की मौत हो गई थी। गुरुग्राम में इस मॉक ड्रिल से प्रशासन ने ऐसी स्थितियों में तैयारियों की जांच की। सभी टीमें समय पर पहुंचीं, सर्च और रेस्क्यू प्रक्रिया को अमल में लाया गया और स्थिति को ‘ऑल क्लियर’ घोषित किया गया।
डीसीपी ने बताया कि हमारा लक्ष्य है कि कोई भी नागरिक डूबने जैसी आपदा में फंसे तो 10-15 मिनट के अंदर रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंच जाए। नोएडा की घटना ने हमें सिखाया कि उपकरण, प्रशिक्षित स्विमर और समन्वय कितना महत्वपूर्ण है। इस मॉक ड्रिल में फायर ब्रिगेड की डाइविंग टीम, पुलिस की क्विक रिस्पॉन्स टीम और एसडीआरएफ ने मिलकर काम किया।
हमने रिस्पांस टाइम, कम्युनिकेशन और उपकरणों की जांच की। गुरुग्राम में पिछले कुछ वर्षों में तालाबों, नहरों, निर्माण स्थलों पर खुले गड्ढों और स्विमिंग पूल में डूबने की कई घटनाएं हुई हैं। बच्चों और युवाओं की मौतें हो रही हैं। प्रशासन द्वारा अब शहर के उन संवेदनशील इलाकों में जहां जलाशय और निर्माण कार्य अधिक हैं, यहां नियमित मॉक ड्रिल की योजना बनाई जा रही है।
नागरिकों से अपील की गई है कि रात में अंधेरे में पानी के निकट न जाएं, बच्चों को अकेला न छोड़ें और किसी संदिग्ध स्थिति में तुरंत 112 या 101 पर कॉल करें। प्रशासन द्वारा जल्द ही अन्य सेक्टरों में भी रात्रि मॉक ड्रिल आयोजित की जाएंगी, ताकि पूरी टीम तैयार रहे। उम्मीद है कि ऐसी तैयारियां वास्तविक हादसों को कम करेंगी और नोएडा जैसी घटनाओं को दोहराने से रोका जा सकेगा।



