गुरुग्राम के गांव में ‘अतिथि देवो भवः’ की जीवंत मिसाल, डच बाइकर मीके हिजमान ने साझा किया भावुक अनुभव
गुरुग्राम। भारत की मिट्टी में मेहमाननवाज़ी केवल शब्द नहीं, एक संस्कार है। “अतिथि देवो भवः” यहां किताबों में नहीं, रोज़मर्रा की जिंदगी में सांस लेता है। इसका ताज़ा उदाहरण हरियाणा के एक गांव में देखने को मिला, जहां नीदरलैंड से आईं सोलो ट्रैवलर और बाइकर मीके हिजमान को ऐसा आत्मीय स्वागत मिला कि उन्होंने इसे अपने जीवन का यादगार अनुभव बताया।

मीके इन दिनों बाइक से भारत भ्रमण पर हैं। खेतों, गांवों और अनजानी पगडंडियों के बीच भारत को करीब से जानने की उनकी कोशिश उन्हें हरियाणा के एक गांव तक ले आई। शाम ढलने लगी थी, आसमान नीले से धूसर हो रहा था और उन्हें रात बिताने के लिए सुरक्षित जगह की तलाश थी। तभी उनकी नजर खेत में काम कर रही एक महिला पर पड़ी।


मीके ने पास जाकर मुस्कुराते हुए पूछा, “डू यू स्पीक इंग्लिश?” महिला ने हल्की हंसी के साथ इशारों में जवाब दिया कि उन्हें अंग्रेज़ी नहीं आती। भाषा की दीवार खड़ी थी, लेकिन दिलों के दरवाज़े खुले थे। महिला ने मना करने के बजाय अपने बेटे तुषार को बुलाया, जो अनुवाद में मदद कर सके।
तुषार के आने पर मीके ने अपनी बात रखी कि वह एक सुरक्षित स्थान तलाश रही हैं, जहां रात के लिए अपना टेंट लगा सकें। उन्होंने पूछा कि क्या खेत के किनारे वह तम्बू लगा सकती हैं। सवाल सीधा था, लेकिन जवाब उससे कहीं ज्यादा उदार।

परिवार ने न केवल टेंट लगाने की अनुमति दी, बल्कि उन्हें अपने घर में रुकने का भी प्रस्ताव दिया। ग्रामीण परिवार ने खाने-पीने से लेकर आराम तक हर जरूरत का ख्याल रखा। जिस अनजान धरती पर वह कुछ घंटों पहले पहुंची थीं, वही जगह कुछ ही पलों में मीके को अपनापन देने लगी।
मीके ने इस पूरे अनुभव को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए भारतीय आतिथ्य की खुलकर सराहना की। उन्होंने लिखा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि एक अनजान गांव में इस तरह का स्नेह और सुरक्षा का एहसास मिलेगा। उनके मुताबिक, यह सिर्फ ठहरने की जगह नहीं थी, बल्कि विश्वास और मानवता का एहसास था।


सोशल मीडिया पर यह कहानी तेजी से वायरल हो रही है। लोग इसे भारत की असली पहचान बता रहे हैं, जहां भाषा अलग हो सकती है, लेकिन भावनाएं नहीं। गांव की उस महिला और उनके परिवार की सादगी ने यह साबित कर दिया कि मेहमाननवाज़ी किसी बड़े शहर या आलीशान होटल की मोहताज नहीं होती।
इस घटना ने एक बार फिर दिखाया कि भारत की असली ताकत उसके गांवों में बसती है। यहां संसाधन सीमित हो सकते हैं, लेकिन दिलों की जमीन बेहद विशाल है। मीके हिजमान की यह यात्रा सिर्फ एक ट्रैवल स्टोरी नहीं रही, बल्कि एक ऐसा अनुभव बन गई, जो दुनिया को यह संदेश देता है कि इंसानियत की भाषा सबसे सार्वभौमिक होती है।

मीके को ये मेहमाननवाजी इतनी पसंद आई कि उन्होंने इसका वीडियो यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर डाल दिया जहां यूट्यूब पर उनका वीडियो करीब 3 लाख लोगों ने देखा है और इंस्टाग्राम पर तो इसकी संख्या 3 मिलियन तक पहुंच चुकी है। दुनिया भर के लोग इस मेहमाननवाजी की दिल खोल कर तारीफ कर रहे हैं।



