गुरुग्राम | 17 फरवरी 2026
सरस आजीविका मेला 2026: परंपरा, प्रतिभा और आत्मनिर्भरता का रंगमंच
गुरुग्राम में सजे सरस आजीविका मेला 2026 ने इन दिनों पूरे देश की सांस्कृतिक धड़कनों को एक ही छत के नीचे समेट लिया है। ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित इस मेले में भारत के विभिन्न राज्यों से आए कारीगर अपनी सदियों पुरानी कला, हस्तनिर्मित उत्पादों और ऑर्गेनिक श्रृंखला के साथ दर्शकों को आकर्षित कर रहे हैं। हर स्टॉल मानो एक अलग प्रदेश की कहानी सुनाता है, जिसमें मेहनत की महक और परंपरा की चमक साफ झलकती है।
झारखंड की ट्राइबल ज्वेलरी: विरासत की झंकार

झारखंड से पहुंचे कारीगर पारंपरिक ट्राइबल ज्वेलरी की ऐसी झलक पेश कर रहे हैं, जो इतिहास और संस्कृति की जीवंत मिसाल है। चांदी और अन्य धातुओं से तैयार हार, पायल, चूड़ी और विशिष्ट आभूषण दर्शकों का ध्यान खींच रहे हैं। खासकर ‘पेरी भांगड़ी’ और ‘थेला’ जैसे पारंपरिक गहनों की मांग अधिक देखी जा रही है। इन आभूषणों की तैयारी में महीनों की मेहनत और वर्षों की साधना शामिल होती है। हर डिज़ाइन में जनजातीय पहचान, प्रकृति से जुड़ाव और सांस्कृतिक प्रतीकात्मकता झलकती है।

महाराष्ट्र की कोल्हापुरी चप्पल: परंपरा का कदमताल
महाराष्ट्र से आई महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य हस्तनिर्मित कोल्हापुरी चप्पलों के साथ मेले में विशेष आकर्षण बनी हुई हैं। शुद्ध लेदर से बनी ये चप्पलें महिलाओं और पुरुषों दोनों के लिए विभिन्न डिज़ाइन और आकार में उपलब्ध हैं। पारंपरिक तकनीक से बिना मशीन के तैयार की गई एक जोड़ी चप्पल को बनाने में कई दिनों की बारीक कारीगरी लगती है। मजबूत सिलाई, टिकाऊपन और आरामदायक बनावट के कारण ये चप्पलें ग्राहकों की पसंद बन रही हैं।
होम डेकोर में परंपरा और आधुनिकता का संगम

मेले में लकड़ी और मेटल से बने सजावटी शोपीस भी लोगों को खूब आकर्षित कर रहे हैं। पारंपरिक डिज़ाइन को आधुनिक उपयोगिता के साथ प्रस्तुत किया गया है, जिससे ये उत्पाद घरों और कार्यालयों दोनों के लिए उपयुक्त साबित हो रहे हैं। हस्तनिर्मित दीवार सजावट, टेबल डेकोर और कलात्मक मूर्तियां मेले की रौनक बढ़ा रही हैं।

ऑर्गेनिक उत्पादों की बढ़ती लोकप्रियता
झारखंड से लाई गई ऑर्गेनिक उत्पादों की श्रृंखला भी लोगों के बीच खासा लोकप्रिय हो रही है। फेस वॉश, क्रीम, लिप बाम, स्क्रब और अन्य स्किन केयर उत्पाद प्राकृतिक सामग्रियों से तैयार किए गए हैं। ‘कोल्ड प्रोसेस’ विधि से बनाए गए इन उत्पादों को त्वचा के लिए सुरक्षित और रसायन मुक्त बताया जा रहा है। उपभोक्ताओं में प्राकृतिक और पारंपरिक विकल्पों की बढ़ती रुचि इन स्टॉल्स पर साफ दिखाई दे रही है।
आत्मनिर्भरता की दिशा में सशक्त कदम
मेले में प्रतिदिन बड़ी संख्या में आगंतुक पहुंच रहे हैं और ग्रामीण कारीगरों के हुनर की सराहना कर रहे हैं। यह आयोजन न केवल हस्तशिल्प और पारंपरिक कला को एक बड़ा मंच प्रदान कर रहा है, बल्कि महिला स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
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