Bilkul Sateek News
चंडीगढ़, 20 जनवरी। नायब सिंह सैनी सरकार ने प्रदेश के हजारों भूखंड स्वामियों को बड़ी राहत देते हुए ‘इम्प्रूवमेंट स्कीम’ के तहत आवंटित प्लॉटों की सेल डीड (बिक्री विलेख) के लिए समय सीमा बढ़ा दी है। हालांकि, यह राहत सशर्त होगी और मालिकों को इसके लिए ‘एक्सटेंशन फीस’ का भुगतान करना होगा।
यह नई व्यवस्था इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट योजनाओं पर लागू होगी। गुरुग्राम, फरीदाबाद और मानेसर में ये फीस अन्य नगर परिषद, समितियों की अपेक्षा सबसे ज्यादा रखी गई है। सूत्रों के अनुसार, यह पुराने नियमों में मौजूद सीमाओं को दूर करती है और राज्य भर के विभिन्न नगर निकायों में विस्तार की प्रतीक्षा कर रहे हजारों मालिकों की मदद करेगी।
एक्सटेंशन फीस
गुरुग्राम, फरीदाबाद और मानेसर में खाली भूखंडों के मालिकों को अब 60 रुपये प्रति वर्ग मीटर प्रतिवर्ष का भुगतान करना होगा। अन्य नगर निगमों, परिषदों और समितियों के लिए दरें क्रमशः 40, 30 और 20 रुपये प्रति वर्ग मीटर हैं। ये दरें बिक्री विलेख आवेदन जमा करने तक लागू रहेंगी। जिन भूखंडों का निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है और जिनके पास निर्माण प्रमाण पत्र नहीं है, उनके लिए शुल्क आधा है: उन क्षेत्रों में प्रति वर्ग मीटर 30, 20, 15 और 10 रुपये देना होगा।
फीस का गुणा-गणित
उदाहरण के लिए, गुरुग्राम, फरीदाबाद और मानेसर में 1 जनवरी 1990 को आवंटित किसी खाली भूखंड के मालिक को 1 जनवरी 2025 को सेल डीड के निष्पादन के लिए आवेदन करने पर 3.96 लाख रुपये का भुगतान करना होगा। हालांकि, नगर समिति के अंतर्गत आने वाली संपत्ति के लिए विस्तार शुल्क लगभग 1.32 लाख रुपये होगा।
इंप्रूवमेंट ट्रस्ट
इंप्रूवमेंट ट्रस्ट योजना वह सरकारी योजना होती है, जिसके तहत शहरों के नियोजित विकास के लिए जमीन अधिग्रहित कर उस पर आवासीय, व्यावसायिक, औद्योगिक या संस्थागत सेक्टर विकसित किए जाते हैं। इन योजनाओं को पहले इंप्रूवमेंट ट्रस्ट और अब कई जगह नगर निगम, शहरी स्थानीय निकाय संचालित कर रहे हैं।
योजना का मकसद
इंप्रूवमेंट ट्रस्ट का उद्देश्य अव्यवस्थित बस्तियों को हटाना होता है। इसके तहत नई कॉलोनियां और सेक्टर विकसित किया जाता है। सड़क, सीवर, पानी, बिजली जैसी मूल सुविधाएं देना लोगों को कानूनी और विकसित प्लॉट उपलब्ध कराना होता है। सड़क, ड्रेनेज, पार्क, बिजली-पानी जैसी सुविधाएं विकसित की जाती हैं। इसके बाद ड्रॉ, नीलामी, आवंटन के जरिए प्लॉट दिए जाते हैं। प्लॉट पहले आवंटन पत्र दिए जाते हैं। तय शर्तें पूरी होने पर बाद में सेल डीड होती है।



