Bilkil Sateek News
Reporter: Pardeep Narula
Author: Pardeep Narula
Gurugram में पहली बार पुलिस ने Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) की धारा 107 के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए महज 60 दिनों के भीतर एक पीड़िता को 10 लाख 13 हजार रुपये का चेक सौंपा है। यह कदम इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि अब तक इस तरह की संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई मुख्य रूप से Enforcement Directorate जैसी एजेंसियां करती थीं, लेकिन इस मामले में स्थानीय पुलिस ने खुद पहल की।

क्या है BNS की धारा 107?
धारा 107 के तहत अदालत को यह अधिकार है कि यदि कोई संपत्ति अपराध से अर्जित की गई हो, तो उसे कुर्क यानी अटैच किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में बैंक खातों को फ्रीज करना, चल और अचल संपत्ति को सील करना और जरूरत पड़ने पर नीलामी करना जैसे कदम शामिल हैं। इसका उद्देश्य केवल आरोपी को सजा देना नहीं, बल्कि पीड़ित को वास्तविक आर्थिक राहत पहुंचाना भी है।
शादी के नाम पर ठगी, 18 लाख रुपये ट्रांसफर
मामला शादी का झांसा देकर धोखाधड़ी का है। जयपुर निवासी एक व्यक्ति ने गुरुग्राम की एक युवती को शादी का भरोसा दिलाया। आरोप है कि उसने संबंध बनाने के बाद युवती से 18 लाख रुपये अपने खाते में ट्रांसफर करवा लिए। इतना ही नहीं, आरोपी ने इसी रकम से एक नई फॉक्सवैगन कार खरीद ली। कुछ समय बाद उसने युवती से संबंध तोड़ लिया। पीड़िता ने सेक्टर-10 थाना में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
गाड़ी कुर्क, नीलामी के बाद चेक सौंपा
जांच के दौरान अदालत में BNS 107 के तहत आरोपी की कार को कुर्क किया गया। बाद में नीलामी कराई गई, जिससे 10 लाख 13 हजार रुपये प्राप्त हुए। यह राशि चेक के रूप में पीड़िता को सौंप दी गई। एसीपी Abhilash Joshi के मुताबिक, गुरुग्राम में यह पहला मामला है जहां पुलिस ने BNS 107 के तहत संपत्ति अटैच कर पीड़िता को मुआवजा दिलाया है। उन्होंने बताया कि बाकी बची रकम की वसूली के लिए आरोपी के बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
क्यों अहम है यह कार्रवाई?
यह मामला दिखाता है कि नया कानून केवल सजा तक सीमित नहीं है, बल्कि पीड़ित को आर्थिक न्याय दिलाने पर भी केंद्रित है। यदि अदालत में यह साबित हो जाए कि संपत्ति अपराध से अर्जित की गई है, तो उसे बेचकर या जब्त कर पीड़ित को मुआवजा दिया जा सकता है। कुल मिलाकर, गुरुग्राम पुलिस की यह कार्रवाई भविष्य के मामलों के लिए एक मिसाल बन सकती है, जहां न्याय केवल फैसले में नहीं, बल्कि राहत की रकम में भी दिखेगा।




