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गुरुग्राम, 21 नवंबर। गुरुग्राम पुलिस ने चीनी मूल के लोगों के साथ मिलकर कतबूरबाजी करने वाले 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। मानव तस्करी में लिप्त दोनों आरोपी शिकारों को अवैध तरीके से विदेश में ले जाकर जबरन साइबर ठगी का काम करवाते थे। मना करने पर शिकारों को मौत के घाट उतारने की धमकी देते थे। साइबर ठगी से मिलने वाली रकम से उन्हें मोटा कमीशन भी मिलता था। आरोपी हरियाणा और राजस्थान से करीब 10 युवाओं को विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर मानव तस्करी व साइबर ठगी के मामलों में संलिप्त रहे हैं।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार एक व्यक्ति ने 15 नवंबर को पुलिस थाना साइबर अपराध दक्षिण को एक लिखित शिकायत में बताया कि उसकी मुलाकात सोनू नाम के युवक से गुरुग्राम में हुई थी। सोनू ने उसको बताया कि उसका भाई विदेश (थाईलैंड) में नौकरी दिलाने का काम करता है। तो वह सोनू की बातों में आ गया और उसने सोनू को थाईलैंड जाने के लिए टिकट के लिए 50 हजार रुपये दे दिए। सोनू ने उसे 23.03.2025 को जयपुर से थाईलैंड की टिकट दी। 23.03.2025 को सोनू का भाई जितेंद्र उसे थाईलैंड में मिला। जिसने उससे 1000 थाई करेंसी ले ली और उसको गाड़ी में बैठाकर अवैध तरीके से म्यांमार बॉर्डर ले गया, जहां पर उसको डाटा ऑपरेटर की जॉब दिलाई। वह यूएस के लोगों का डाटा अवैध तरीके से जुटाने का काम करने लगा, जब उसने सोनू को बताया कि यह तो अवैध तरीका है, मुझे थाईलैंड के नाम पर म्यांमार क्यों भेज दिया। तो सोनू ने उसे जान से मारने की धमकी दी। 22.10.2025 को उसे म्यांमार की सेना ने पकड़ लिया और उसे म्यांमार पुलिस के हवाले कर दिया। 06.11.2025 को उसे थाईलैंड से दिल्ली डिपोर्ट किया गया। प्राप्त शिकायत पर पुलिस ने मानव तस्करी व साइबर ठगी/ठगी व संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया।
थाना साइबर अपराध दक्षिण प्रभारी नवीन कुमार की टीम ने कार्रवाई करते हुए इस मामले में दोनों आरोपियों को 19 नवंबर को वजीराबाद पुलिस एकेडमी दिल्ली से काबू गिरफ्तार किया। आरोपियों की पहचान विजेंद्र उर्फ सोनू (उम्र-23 वर्ष) और जितेंद्र उर्फ मोनू (उम्र-21 वर्ष) निवासी गांव बडवा जिला भिवानी (हरियाणा) के रूप में हुई।
पुलिस पूछताछ में पता चला कि जितेंद्र उर्फ मोनू जनवरी 2025 को म्यांमार गया था, जहां वह चाइना मूल के लोगों से मिला और यह उनके साथ मिलकर साइबर फ्रॉड के काम करने लगा। उसने अपने भाई विजेंद्र उर्फ सोनू को बताया कि यहां चाइनीज लोग अवैध तरीके के काम/ठगी के लिए लड़के बुलाते हैं और कमीशन के तौर पर प्रत्येक व्यक्ति के बदले 1000 डॉलर कमीशन देते हैं तथा एजेंट को 3000 डॉलर देते हैं। विजेंद्र उर्फ सोनू ने इस मामले में शिकायकर्ता मंदीप को अपने भाई जितेंद्र के कहने पर थाईलैंड भेजा और वहां से म्यांमार भेज दिया था। जिसके बदले सोनू को 3000 डॉलर और जितेंद्र को 1000 डॉलर का कमीशन मिला था। सोनू ने बताया कि जितेंद्र के कहने पर वह सितंबर 2025 में म्यांमार गया था। 21 अक्टूबर को म्यांमार सेना ने इन दोनों को पकड़ लिया और 19 नवंबर को इन्हें दिल्ली डिपोर्ट कर दिया।
पुलिस पूछताछ में यह भी पता चला कि ये दोनों मानव तस्करी करने, नौकरी का झांसा देकर साइबर ठगी के लिए युवाओं को विदेश भेजने तथा विदेश ले जाकर उन्हें किसी अन्य देश ले जाकर उन्हें जान से मारने की धमकी देकर अवैध कार्य कराने की वारदातों को अंजाम देते थे। इसके बदले वे अपने चाइना मूल के साथियों से मोटा कमीशन प्राप्त करते थे। वे अब तक हरियाणा और राजस्थान के करीब 10 युवाओं को नौकरी का झांसा देकर विदेश भेजने की वारदातों को अंजाम देने में संलिप्त रहे हैं।



