
फरीदाबाद का सरकारी अस्पताल बने रेफर मुक्त
फरीदाबाद में बनाया जाए ट्राॅमा सेंटर
40 दिन से धरने पर बैठे हैं प्रदर्शनकारी
महेश की बीमार बेटी चढ़ चुकी है अव्यवस्था की भेंट
Bilkul Sateek News
फरीदाबाद (अजय वर्मा ), 11 जनवरी। स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार को लेकर आज फरीदाबाद में ग्यारह प्रदर्शनकारियों ने सामूहिक मुंडन करवाया। प्रदर्शनकारी पिछले चालीस दिन से धरने पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी फरीदाबाद के सरकारी अस्पताल को रेफर मुक्त करने और फरीदाबाद में ट्राॅमा सेंटर बनाने की मांग कर रहे हैं। इनमें से एक प्रदर्शनकारी महेश की बीमार बेटी सरकारी अव्यवस्था की भेंट चढ़ चुकी है। जिसकी बेटी को सिविल अस्पताल ने दिल्ली रेफर किया था। परंतु निजी एंबुलेंस वाला उसे गुमराह कर निजी अस्पताल में ले गया। जहां पर उसे मोटा बिल थमा दिया गया और बेटी भी नहीं बची।
मीडिया से बातचीत में समाजसेवी सतीश चोपड़ा ने बताया कि सरकार की मंशा लोगों को लाभ पहुंचाने की है। इसीलिए वह जनहितैषी नीतियां बना रही है, ताकि आमजन को इसका फायदा मिल सके। परंतु नीचे बैठे भ्रष्ट अधिकारी सरकार की नीतियों पलीता लगा रहे हैं। यही कारण है कि आज तक फरीदाबाद रेफर मुक्त नहीं हो पाया है। डॉक्टरों की सांठगांठ से आज भी फरीदाबाद में प्राइवेट अस्पताल और प्राइवेट एंबुलेंस चालकों को मोटा फायदा हो रहा है। सतीश चोपड़ा ने बताया कि आज भले ही फरीदाबाद के 6 में मेडिकल कॉलेज सरकार ने खोला हो, परंतु आज भी वहां पर कोई भी इलाज नहीं होता। इतना ही नहीं फरीदाबाद के सबसे बड़े सिविल अस्पताल बादशाह खान में भी अधिकतर मरीजों को दिल्ली रेफर कर दिया जाता है। सतीश चोपड़ा ने कहा कि जब तक फरीदाबाद को रेफर मुक्त और ट्रॉमा सेंटर जैसे सुविधा नहीं मिलेगी, तब तक यह धरना लगातार जारी रहेगा।
वहीं, समाजसेवी फूल महेश ने बताया कि वह खुद आज इस स्थिति से गुजर चुका है, जहां उसकी बेटी ने फरीदाबाद में सही व्यवस्था न होने के चलते दम तोड़ दिया। महेश ने बताया कि उसकी बेटी कुछ दिनों पहले बीमार हुई थी और उसे इलाज के लिए फरीदाबाद के सिविल अस्पताल लाया गया जहां पर उसे डॉक्टरों ने चेक करने के बाद दिल्ली के लिए रेफर कर दिया। परंतु जो अस्पताल के अंदर प्राइवेट एंबुलेंस चालक बैठे हुए हैं, उनके द्वारा मुझे भ्रमित किया गया और एक प्राइवेट अस्पताल में मेरी बेटी को एडमिट करवा दिया। जहां पर प्राइवेट अस्पताल की तरफ से मुझे मोटी रकम भी वसूल की गई और मेरी बेटी भी नहीं बच पाई। फूल महेश का कहना है कि यदि फरीदाबाद में सही व्यवस्था और उचित डॉक्टर हो तो किसी की बेटी की जान नहीं जाएगी।