जल ने दिया कुंड को नवजीवन
सूरजकुंड में फिर से अठखेलियां करेंगी सूर्य की किरणें
वास्तुकला व इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण “सूर्य की झील”
Bilkul Sateek News
फरीदाबाद (अजय वर्मा), 1 दिसंबर। फरीदाबाद का सूरजकुंड एक बार फिर से जल से लबालब भरा हुआ है, जिसके चलते कुंड की ख़ूबसूरती एक बार फिर से देखने को मिल रही है और यहां पहुंचने वाले लोग इसे जल से भरा हुआ देखकर खुश हो रहे है।
सूरजकुंड का इतिहास 10वीं शताब्दी में तोमर वंश के राजा सूरज पाल से जुड़ा है, जिन्होंने सूर्य की उपासना के लिए इस जलाशय का निर्माण कराया था। इसका अर्थ ‘सूर्य की झील’ है और यह तत्कालीन वास्तुकला और इंजीनियरिंग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। बाद में मुगलों और अंग्रेजों ने भी इसमें बदलाव किए; मुगलों ने अपनी वास्तुकला जोड़ी और अंग्रेजों ने इसे पिकनिक और शिकारगाह के रूप में इस्तेमाल किया। वहीं समय के साथ साथ सूरजकुंड देखने दूर-दूर से सैलानी आते रहे, लेकिन वर्ष 2003 तक सूरजकुंड पूरी तरह से सूख चुका था और सूरजकुंड जिसके नाम से आज अंतरराष्ट्रीय स्तर का सूरजकुंड हस्तशिल्प मेला लगाया जाता है और देश ही नहीं विदेश से हस्तशिल्पी यहां पहुंचते है। लेकिन वर्ष 2003 से सूरजकुंड का जल पूरी तरह से सूख चूका था और पर्यटकों ने इसकी ओर आना बंद कर दिया था, लेकिन एक बार फिर से इसमें जल भरने के बाद से गिने चुने आने वाले पर्यटक पहुंच रहे हैं और उनमें नई पीढ़ी के जेन जी है, जो कुंड की ख़ूबसूरती से मंत्रमुग्ध हैं और उनका (कोमल और संध्या) कहना है कि सूरजकुंड जल से भरा हुआ बहुत खूबसूरत लगता है और अब वह चाहते हैं कि यहां बोटिंग होनी चाहिए। वहीं कुछ लोग यहां गंदगी भी फैला रहे हैं जो की गलत है इसे साफ़ सुथरा रखना चाहिए।
उधर, भारतीय पुरातत्व विभाग के अधिकारी अजीत सिंह ने बताया कि उनके विभाग के द्वारा रेन हार्वेस्टिंग स्कीम को पूरा किया गया है। जिसके कारण विभाग के प्रयासों से इसमें एक बार फिर से पानी भरा हुआ है। जिससे टूरिस्ट का आना जाना बढ़ेगा। वहीं, आने वाले समय में क्या सूरजकुंड में बोटिंग शुरू हो सकती है के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि फिलहाल वह इस पर वह कुछ स्पष्ट नहीं कह सकते हैं और पुरातत्व विभाग के बड़े अधिकारी ही इस पर स्पष्ट जानकारी दे सकते हैं। वहीं, उन्होंने टूरिस्ट से अपील की है की वह यहां आए घूमे लेकिन गंदगी न फैलाएं और डस्टबीन में ही कूड़ा डाले।
वहीं, हरियाणा टूरिजम के जीएम हरविंदर यादव ने भी ख़ुशी जाहिर की है कि वर्ष 2003 के बाद जिस तरह से सूरजकुंड जल से भरा हुआ है और ंम्बे दशक के बाद फिर से इसकी खूबसूरती लौटी है जिसका श्रेय प्रकृति के साथ-साथ और आर्किलोजिकल विभाग को जाता है, जिन्होंने इसकी देखरेख की है। उन्होंने बताया कि एक दो प्रोजेक्ट और है कि पानी को डायवर्ट करने के लिए प्लानिंग कर रहे हैं और जिससे जल स्तर और बढ़ेगा। उन्होंने उम्मीद जाहिर की है कि कुंड में जल आने के बाद सैलानियों का रुझान बढ़ेगा और टूरिस्ट आएंगे। उन्होंने बोटिंग पर कहा की क्योंकि सूरजकुंड एक संरक्षित मॉन्युमेंट है तो इसी को ध्यान में रखकर यदि नियमों के अनुसार बोटिंग हो सकती होगी तो बोटिंग भी करवाई जा सकती है।




