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गुरुग्राम, 15 जनवरी। नेट-जीरो इंजीनियरिंग के क्षेत्र में पहचान बना चुकी गुरुग्राम स्थित कंपनी ’बूट्स’ ने अब औपचारिक रूप से रियल एस्टेट सेक्टर में कदम रख दिया है। कंपनी ने 6,300 करोड़ रुपये से अधिक की इन्वेंट्री के साथ अपने रियल्टी वर्टिकल की शुरुआत की घोषणा की है। बूट्स का यह प्रवेश ऐसे समय पर हुआ है, जब देश के बड़े शहर वायु प्रदूषण, जल संकट और बढ़ती बिजली लागत जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं।
अब तक सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में उच्च-प्रदर्शन और नेट-जीरो इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर काम करने वाली बूट्स, अपने इंजीनियरिंग अनुभव को सीधे आवासीय विकास में लागू कर रही है। कंपनी का दावा है कि उसका फोकस पारंपरिक रियल एस्टेट मॉडल से अलग, मापने योग्य जीवन गुणवत्ता सुधार पर आधारित है।
बूट्स के प्रबंध निदेशक दीपक राय का कहना है कि कंपनी शहरी जीवन की बुनियादी समस्याओं को केंद्र में रखकर आवासीय परियोजनाएं विकसित कर रही है। उनके अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सबसे गंभीर संकट वायु गुणवत्ता का है। इसी को ध्यान में रखते हुए घरों को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि इनडोर एयर क्वालिटी इंडेक्स 50 से नीचे रहे और कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर नियंत्रित हो। इसके साथ ही जल सुरक्षा के लिए लाइव मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए जा रहे हैं, जो पानी की शुद्धता, प्रवाह और उपयोग की दक्षता पर लगातार नजर रखते हैं। ऊर्जा खपत को लेकर भी कंपनी का दावा है कि केंद्रीकृत और ऊर्जा-कुशल प्रणालियों के माध्यम से बिजली की खपत में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
रियल एस्टेट क्षेत्र में अपनी शुरुआत बूट्स ने नोएडा, अलवर और वृंदावन से की है। पहले चरण में कंपनी 60 लाख वर्ग फुट से अधिक का सेलएबल एरिया विकसित कर रही है। नोएडा के ग्रेटर नोएडा वेस्ट और सेक्टर 76 में प्रीमियम हाई-राइज आवासीय परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जहां 4 बीएचके फ्लैट और डुप्लेक्स पेंटहाउस शामिल होंगे। इन परियोजनाओं को इंजीनियरिंग-आधारित डिजाइन और स्वास्थ्य-संवेदनशील दृष्टिकोण के साथ विकसित किया जा रहा है।
अलवर में कंपनी ने शहर की सबसे ऊंची आवासीय इमारत के रूप में चिन्हित एक परियोजना शुरू की है, जिसमें 2 और 3 बीएचके आवास उपलब्ध कराए जाएंगे। इस परियोजना में सुरक्षा, स्वच्छ इनडोर वातावरण और ऊर्जा दक्षता को प्रमुख आधार बनाया गया है।
आगामी वर्षों में बूट्स मुंबई, लखनऊ, अयोध्या, देहरादून, कुरुक्षेत्र, झांसी, चित्रकूट और प्रयागराज जैसे शहरों में विस्तार की योजना बना रही है। कंपनी का ध्यान मुख्य रूप से एंड-यूजर मांग पर रहेगा, न कि केवल निवेश आधारित विकास पर। इसके साथ ही विभिन्न शहरों में दोहराए जा सकने वाले आवासीय मॉडल तैयार करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
इंजीनियरिंग और सस्टेनेबिलिटी आधारित संगठन के रूप में बूट्स इससे पहले झांसी की दुनिया की पहली नेट-जीरो लाइब्रेरी और कुरुक्षेत्र के नेट-जीरो म्यूजियम जैसी परियोजनाओं को पूरा कर चुका है। कंपनी का मानना है’ कि भारतीय आवास क्षेत्र का भविष्य सिर्फ दिखावटी लग्जरी तक सीमित नहीं होना चाहिए, इसे स्वास्थ्य, दक्षता, सुरक्षा और दीर्घकालिक टिकाऊपन जैसे ठोस मानकों पर आधारित होना चाहिए।
बूट्स की दीर्घकालिक परिकल्पना ‘आत्मनिर्भर आवास’ की है, ऐसे घर जो बाहरी बिजली, पानी और सीवर प्रणालियों पर न्यूनतम निर्भरता के साथ काम कर सकें। इससे जीवन-यापन की लागत घटने के साथ साथ, शहरी बुनियादी ढांचे पर दबाव भी कम होगा और देश के नेट-जीरो लक्ष्यों को मजबूती मिलेगी।



