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गुरुग्राम, 25 सितंबर। राजस्व विभाग ने बुधवार को विवादित महंत ज्योतिगिरी के कब्जे से 570 गज जमीन को छुड़ा लिया। जिसके बाद छुड़ाई गई जमीन का कब्जा पंचायत को सौंप दिया गया।
भौड़ा कलां गांव में हनुमान मंदिर को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। राजस्व विभाग की टीम ने कल गांव में पहुंचकर विवादित जमीन की पैमाइश की और आश्रम के महंत ज्योतिगिरी द्वारा कथित रूप से कब्जाई गई 570 गज जमीन को मुक्त करवाया। इस दौरान सरपंच समेत मौजिज लोगों की मौजूदगी में पटवारी और राजस्व विभाग के अधिकारियों ने कई घंटे तक पैमाइश की। शाम के समय मौजिज लोगों की एक मीटिंग भी हुई। जिसमें कहा कि गया कि बेशक महंत ज्योतिगिरी के कब्जे से जमीन मुक्त करवा ली गई है, लेकिन गांव में उनके प्रवेश रोकने का फैसला जारी रहेगा। इस दौरान सरपंच मनबीर सिंह, उदय चौहान, गिरदावर बिजेन्द्र, कुशलपाल दहिया आरपीएस डायरेक्टर आदि मौजूद रहे।
वहीं, बाबा ज्योतिगिरी ने एक दैनिक समाचार पत्र को फोन पर बताया कि राजस्व विभाग की पैमाइश में अगर कुछ जमीन पंचायत की निकली है तो मुझे कोई एतराज नहीं है। गांव में मेरी खरीदी हुई जमीन है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि महंत ज्योतिगिरी ने हनुमान मंदिर के पास पंचायती जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया और वहां आश्रम बनवा लिया। ग्रामीणों का कहना है कि यह जमीन सामुदायिक उपयोग के लिए थी और इसका दुरुपयोग किया गया।
सरपंच मनबीर चौहान ने बताया कि ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से फैसला लिया है कि ज्योतिगिरी को गांव में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जमीन पर अवैध कब्जा छुड़वा लिया गया है। ग्रामीणों का साफ रुख है कि महंत को गांव में कोई जगह नहीं दी जाएगी। महंत ने कुछ लोगों और स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत से जमीन पर कब्जा किया और धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल कर ग्रामीणों को गुमराह किया।
इस मुद्दे पर कई बार पंचायत बैठकों में चर्चा हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। आखिरकार, ग्रामीणों की शिकायत पर राजस्व विभाग ने हस्तक्षेप किया और पैमाइश के बाद 570 गज जमीन को पंचायत के हवाले कर दिया गया।
दूसरी ओर महंत ज्योतिगिरी ने इस कार्रवाई पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, ‘अगर जमीन पंचायत की है, तो उसे मुक्त कराने में मुझे कोई आपत्ति नहीं है। मैंने कभी जबरदस्ती कब्जा नहीं किया। मेरी निजी जमीन गांव में है और जब समय अनुकूल होगा, मैं अपने आश्रम में जरूर आऊंगा।’ हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वह फिलहाल गांव में नहीं आ रहे हैं। उनका कहना है कि कुछ लोगों के खिलाफ गबन और चोरी की एफआईआर दर्ज करवाई थी, जिसके कारण वे लोग विरोध कर रहे हैं।
यह विवाद केवल जमीन के कब्जे तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि ज्योतिगिरी ने मंदिर के प्रबंधन में भी अनियमितताएं कीं और दान के पैसे का गलत इस्तेमाल किया। दूसरी ओर महंत के समर्थकों का दावा है कि आश्रम का निर्माण धार्मिक कार्यों के लिए किया गया था और इसमें कोई गलत इरादा नहीं था।
गांव में शांति व्यवस्था बनाए रखने और स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए पुलिस बल तैनात है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पैमाइश की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से की गई और जमीन का मालिकाना हक पंचायत को सौंप दिया गया है।




