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गुरुग्राम, 2 अक्टूबर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) द्वारा गुरुग्राम महानगर के विभिन्न स्थानों पर भव्य पथ संचलन का आयोजन किया गया। संघ की परंपरा के अनुरूप यह कार्यक्रम अनुशासन, संगठन और राष्ट्रभक्ति की सशक्त प्रेरणा देता है। इस अवसर पर स्वयंसेवक पूर्ण गणवेश में अनुशासित पंक्तियों के साथ नगर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरे। नगरवासीयों ने इस पथ संचलन को देखकर न केवल संगठन की शक्ति का अनुभव किया, बल्कि समाज में एकता और सद्भाव का सशक्त संदेश आत्मसात करते दिखाई दिए। यही वजह रही कि पथ संचलन के मार्ग में खड़े लोगों ने स्वयंसेवकों पर न केवल पुष्प वर्षा की बल्कि भारत माता, वंदेमातरम के जय घोष से उनका अभिनंदन किया।
सनद रहे कि संघ ने अपने शताब्दी वर्ष को विशेष रूप से मनाने के लिए शहर को 37 भागों में बांटा हुआ है। जिसमें से 18 स्थानों पर 18 पथसंचलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शेष स्थानों पर 5 अक्टूबर को कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यक्रम में संघ के सौ वर्ष की यात्रा पर प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया।
इस अवसर पर आरएसएस राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य राम माधव, उत्तरक्षेत्र संपर्क प्रमुख श्री कृष्ण, हरियाणा प्रांत संघचालक प्रताप सिंह की विशेष उपस्थिति रही। पथ संचलन के मार्ग में शहरवासियों के लिए आकर्षण का केंद्र स्वयंसेवकों की दृढ़ चाल, अनुशासनबद्ध कदम और राष्ट्रगीतों की धुन थी। कार्यक्रम की भव्यता में और वृद्धि इस तथ्य से हुई कि इसमें विभिन्न आयु वर्ग के स्वयंसेवकों ने एक साथ एक स्वर और कदम ताल मिलाकर भाग लिया और राष्ट्रहित के प्रति अपने संकल्प को प्रकट किया।
इस विशेष अवसर पर संघ द्वारा आयोजित उत्सव सभा भी रखी गई जिनमें संघ शताब्दी वर्ष की महत्वता, सरसंघचालक मोहन भागवत के दिए पंच परिवर्तन के विषयों को प्रमुखता से रखा गया। उन्होंने संघ की विचारधारा, राष्ट्र निर्माण में स्वयंसेवकों की भूमिका तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की आवश्यकता पर अपने विचार व्यक्त किए। समरसता, शिक्षा और संस्कृति के माध्यम से राष्ट्र को सशक्त बनाने के मुद्दों पर प्रकाश डाला। इन आयोजनों में सम्मलित समाज के लोगों को संघ की गतिविधियों और गुरुग्राम जिले में चल रहे सेवा कार्यों के विषय में संक्षिप्त विवरण दिया तथा समाज के सभी वर्गों से सक्रिय सहयोग का आह्वान किया।
पथ संचलन का उद्देश्य केवल एक अनुशासनबद्ध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह एक जीवंत संदेश है कि संगठित समाज ही मजबूत राष्ट्र की नींव रख सकता है। आज के दौर में जब समाज अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का यह आयोजन हमें एकजुट रहने और अपनी परंपराओं, संस्कृति तथा मूल्यों के संरक्षण की प्रेरणा देता है। इस अवसर पर स्वयंसेवकों ने देशभक्ति गीतों के माध्यम से वातावरण को देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत किया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विगत कई दशकों से समाज जीवन के विविध क्षेत्रों में सेवा, संस्कार और संगठन का कार्य कर रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्राम विकास, पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में संघ के स्वयंसेवक सदैव सक्रिय रहते हैं। गुरुग्राम में आयोजित यह पथ संचलन संघ की इन्हीं सेवाभावी गतिविधियों का प्रतीक है और संघ का यह स्थापना दिवस नगरवासियों को यह विश्वास दिलाता हुआ दिखाई दिया कि एक संगठित समाज ही चुनौतियों का सामना कर सकता है और आत्मनिर्भर राष्ट्र के निर्माण में योगदान दे सकता है।
नगरवासियों ने इस पथ संचलन के मार्गों पर उपस्थित होकर पुष्प वर्षा से स्वयंसेवकों का उत्साहवर्धन किया। समाज के विभिन्न वर्गों की सहभागिता से यह आयोजन और अधिक प्रभावशाली रहा। यह अवसर न केवल देखने योग्य था, बल्कि इसमें निहित संदेश को जीवन में उतारना भी प्रत्येक नागरिक का दायित्व है।

शास्त्र सम्मत शस्त्रों का उपयोग ही शक्ति की आराधना हैः राम माधव
हिंदू समाज में अच्छा करना और बुराई को रोकना और बुराई को अच्छे की तरफ मोड़ना शक्ति का प्रतिपादन रहा है। यह संदेश लेकर आज से 100 साल पहले राष्ट्रीय सेवक संघ की स्थापना 1925 विजयादशमी के दिन हुई थी। संघ ने उसी दिन लक्ष्य दिया था की अपने समाज में सज्जन शक्ति का निर्माण करना है।
शक्ति वो है जो अच्छा कर सके। अच्छा काम करने की ताकत रखना शक्ति होती है। शक्ति केवल अच्छा कार्य करना ही नहीं बल्कि बुरा रोक सके इसे भी शक्ति कहते हैं। जब कभी आप बुरा होते देखते हो तो मन में क्रोध या कभी-कभी द्वेष आता है और विचार आता है कि फलाना व्यक्ति या समाज ख़राब है, उसको समाप्त कर देना चाहिए। लेकिन शक्ति का उपयोग दूसरों को खत्म करने में नहीं है। बल्कि बुराई को अच्छे में परिवर्तित करने में जो ताकत लगती है उसे शक्ति कहते हैं।
आज के दिन हम सब शस्त्रों और शास्त्र की पूजा करते हैं। शास्त्र सम्मत शस्त्र उपयोग ही शक्ति की सच्ची उपासना है। और इसी शक्ति के आधार पर संघ उत्तरोत्तर लगातार आगे बढ़ रहा है और संघ तब तक लगातार कार्य करता रहेगा जब तक संघ और समाज एक रूप ना हो जाए।
सशक्त समाज से होगा सशक्त राष्ट्र का निर्माणः श्रीकृष्ण
साउथ सिटी दो स्थित कम्युनिटी सेंटर पार्क एच ब्लॉक में हुए कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उत्तर क्षेत्र कार्यकारिणी सदस्य श्रीकृष्ण ने कहा कि आज से संघ के शताब्दी वर्ष समारोह का प्रारंभ हो रहा है, उन्होंने संघ के निर्माण के पीछे का हेतु और पिछले सौ साल से संघ का देश और समाज के प्रति योगदान का उल्लेख करते हुए कहा की जिस तरह भगवान श्रीराम के जीवन से हम उनके समाज के हर अंग को साथ लेकर चलने व समरसता कायम करने के उनके प्रयासों से प्रेरित होते हैं, उसी तरह आज संघ के स्वयंसेवक समाज में सामाजिक समरसता व पंच परिवर्तन का काम कर रहे हैं। हमें इसे निरंतर आगे बढ़ाना होगा। समरसता से ही समाज में दिख रही दूरियां मिट जाएगी। समाज संगठित और सशक्त बनेगा। एक सशक्त समाज ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकता है।
संघ के स्वयंसेवकों यह काम निरंतर करते रहना होगा।
आज के कार्यक्रम के मुख्य अतिथि धर्मेंद्र पारीक (सेवानिवृत्त डीआईजी, सीमा सुरक्षा बल) ने भारत की सेनाओं के अनुशासन और जीवनपर्यंत कर्तव्य निभाने के जज्बे का जिक्र करते हुए कहा वह वंदनीय है। उनके अनुसार सेना का यही जज्बा आरएसएस कार्यकर्ताओं में भी दिखाई देता है। जब जब भी देश को आवश्यकता पड़ी है संघ के स्वयंसेवक अग्रणी भूमिका में रहे हैं समर्पण का दूसरा नाम आरएसएस है।
पंच परिवर्तन
पर्यावरण में तीन ‘प’ पर विशेष ध्यान देना। पेड़ अधिक से अधिक लगाना, जन्मदिन या अन्य मांगलिक कार्यों पर पौधारोपण करना, पानी का संरक्षण करना और प्लास्टिक का प्रयोग नहीं करना।
कुटुम्भ प्रबोधन
परिवार में छह ‘भ’ पर विशेष कार्य करने की आवश्यकता है। भोजन, भजन, भाषा, भूषा, भवन परिवार के सभी सदस्यों के साथ साप्ताहिक मंगल मिलन, जन्मदिन व अन्य आयोजन हिंदू तिथि अनुसार, मांगलिक कार्यों में भारतीय वेशभूषा पहनने का चलन आदि।
सामाजिक समरसता
समाज में समरसता की स्थापना। सर्व समाज एक दूसरे का पूरक बनने का भाव। जातिय भेद दूर करना।
स्व का बोध
अपनी भाषा, अपनी भूषा व अपनी परंपरा पर गर्व करना।
नागरिक शिष्टाचार संविधान नियम, कानून और अनुशासन का पालन करना। राष्ट्रीय धरोहर व सार्वजनिक संपत्ति का संरक्षण करना। बिजली-पानी की बचत। यातायात नियम का पालन करना।

राष्ट्र सेविका समिति ने भी मनाया अपना स्थापना दिवस
राष्ट्र सेविका समिति (आरएसएस) ने विजयदशमी पर अपना स्थापना दिवस मनाया। उन्होंने भी सेक्टर 14 सामुदायिक भवन में पथ संचलन का आयोजन किया। इस मौके पर जिला शिक्षा अधिकारी इंदु बोकन ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की व राजकीय द्रोणाचार्य महाविद्यालय की प्रिंसिपल पुष्पा अंतिल भी उपस्थित रहीं। मुख्यवक्ता के रूप में बोलते हुए आरएसएस प्रांत संचालक प्रताप सिंह ने मातृशक्ति का आह्वान करते हुए कहा कि अपनी शक्ति की पहचान करके राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाएं। नारी की शक्ति के आधार पर ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है। उन्हीने पंच परिवर्तन पर समाज के साथ मिलकर कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र सेविका समिति नारी शक्ति जागरण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। आज पथ संचलन में बड़ी संख्या में शामिल नारी शक्ति का शंखनाद हो रहा है। आज नारी घर की जिम्मेदारी से लेकर राष्ट्र की अर्थव्यवस्था निर्माण में अपनी भूमिका निभा रही है।
इस अवसर पर राष्ट्र सेविका समिति की सह प्रांत कार्यवाहिका प्रतिमा मनचंदा भी उपस्थित रहीं।



