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Reporter: Pardeep Narula
Author: Pardeep Narula
गुरुग्राम: पर्यावरण संरक्षण और बेजुबान पक्षियों के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘नवकल्प फाउंडेशन’ द्वारा चलाया जा रहा ‘दाना-पानी नेस्ट’ अभियान अब गुरुग्राम के स्कूलों में तेजी से अपनी पकड़ बना रहा है। इस पहल के तहत हाल ही में रायन इंटरनेशनल स्कूल, सोहना रोड और डीपीएस मारुति कुंज में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।

रायन इंटरनेशनल स्कूल, सोहना रोड में आयोजित सत्र के दौरान विद्यार्थियों को शहरीकरण के बढ़ते प्रभाव के बारे में बताया गया। विशेषज्ञों ने समझाया कि कंक्रीट के जंगल बढ़ने से पक्षियों के प्राकृतिक आवास तेजी से खत्म हो रहे हैं। ऐसे में यदि लोग अपने घरों, बालकनी या आसपास की जगहों पर पक्षियों के लिए दाना-पानी रखें और छोटे-छोटे नेस्ट लगाएं, तो यह उनके लिए बड़ा सहारा बन सकता है।
नवकल्प फाउंडेशन की ओर से मीनाक्षी सक्सेना ने बच्चों से संवाद करते हुए कहा कि प्रकृति की रक्षा केवल संस्थाओं की नहीं, बल्कि हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उन्होंने बच्चों को पौधों की देखभाल करने और नियमित रूप से पक्षियों के लिए पानी और दाना रखने की आदत अपनाने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ नेस्ट बनाने की गतिविधि में भाग लिया। कई छात्रों ने यह भी सीखा कि नेस्ट को सही स्थान पर कैसे लगाया जाए, जिससे पक्षियों को सुरक्षित आश्रय मिल सके। कार्यक्रम के अंत में स्कूल की प्रिंसिपल सजीता अय्यर ने मीनाक्षी सक्सेना को पौधा भेंट कर सम्मानित किया। इस दौरान बच्चों ने मिलकर पक्षियों के लिए दाना-पानी भी रखा।
वहीं, डीपीएस मारुति कुंज में आयोजित कार्यक्रम में प्रिंसिपल अखिलेश चतुर्वेदी ने कहा कि बच्चों में शुरू से ही पक्षियों और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना बेहद जरूरी है। उन्होंने नवकल्प फाउंडेशन के प्रयासों की सराहना की।
वाइस प्रिंसिपल विनोद पपरेजा ने भी इस पहल को सराहनीय बताते हुए कहा कि ऐसे छोटे-छोटे प्रयास ही बच्चों में सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करते हैं। इस मौके पर कई शिक्षक भी मौजूद रहे।
स्कूल प्रशासन ने नवकल्प फाउंडेशन का आभार जताते हुए भविष्य में भी इस तरह की पर्यावरण-हितैषी गतिविधियों को जारी रखने की बात कही। ‘दाना-पानी नेस्ट’ अभियान यह संदेश देता है कि यदि हर व्यक्ति थोड़ी-सी संवेदनशीलता दिखाए, तो पक्षियों और पर्यावरण की रक्षा करना मुश्किल नहीं है।




