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चंडीगढ़। हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) ने आगामी वित्त वर्ष के लिए बिजली दरें तय करने से पहले राज्य की बिजली कम्पनियों से व्यापक वित्तीय, तकनीकी और परिचालन संबंधी अतिरिक्त जानकारी मांगी है। इससे यह संकेत मिलता है कि आयोग टैरिफ निर्धारण से पूर्व गहन नियामक जांच कर रहा है।
अपने अंतरिम आदेशों में आयोग ने कहा कि हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम (एचवीपीएन) और हरियाणा पावर जेनरेशन कॉरपोरेशन (एचपीजीसीएल) की टैरिफ याचिकाओं पर सार्वजनिक सुनवाई पूरी हो चुकी है, लेकिन उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा, पारदर्शिता और विवेकपूर्ण निर्णय सुनिश्चित करने के लिए तथ्यों की आगे भी जांच आवश्यक है।
एचवीपीएन की सुनवाई के बाद आयोग ने प्रसारण कम्पनी को इसकी स्थापना काल से लिए गए विश्व बैंक ऋणों का ब्यौरा देने का निर्देश दिया है, जिसमें ब्याज दरें, विदेशी मुद्रा उतार-चढ़ाव और प्रभावी उधारी लागत शामिल हों। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित मूल्यह्रास (डिप्रिसिएशन) में वृद्धि का औचित्य, प्रगति पर पूंजीगत कार्यों और वित्त वर्ष 2029-30 तक प्रस्तावित पूंजीकरण का विवरण, इक्विटी के रूप में दर्शाई गई अवशिष्ट आय को पूंजी भंडार में स्थानांतरित करने और ब्याज भार कम करने के लिए ऋण अदला-बदली (लोन स्वैप) के विकल्प तलाशने को भी कहा गया है।
एचपीजीसीएल के मामले में आयोग ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए नियमित और संविदा कर्मचारियों की संख्या तथा लागत का विस्तृत ब्योरा मांगा है। साथ ही कोयला सैंपलिंग एजेंसियों के विश्लेषण, पिछले तीन वर्षों में कोयले की गुणवत्ता संबंधी दावों, उत्पादन आंकड़ों, कार्यशील पूंजी ऋण और जल उपलब्धता के बावजूद जलविद्युत संयंत्रों के अनुपलब्ध रहने के कारणों की जानकारी भी तलब की गई है।
आयोग ने उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएनएल) और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएनएल) से जुड़े मामलों में भी एक संयुक्त अंतरिम आदेश पारित किया। आयोग ने कहा कि उत्तरी और दक्षिणी हरियाणा में खुदरा बिजली दरें समान हैं, इसलिए इन याचिकाओं पर एक समान नियामक दृष्टिकोण अपनाया जाना उचित है। इस क्रम में वित्त वर्ष 2024-25 के ट्रू-अप, वित्त वर्ष 2025-26 की मध्यावधि प्रदर्शन समीक्षा और वित्त वर्ष 2026-27 की वार्षिक राजस्व आवश्यकता से जुड़ी याचिकाओं को एक साथ निपटाने का निर्णय लिया गया है।
हालांकि सार्वजनिक सुनवाई पूरी हो चुकी है, लेकिन दोनों डिस्कॉम को हितधारकों की आपत्तियों पर जवाब दाखिल करने और अतिरिक्त जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें विद्युत क्रय समझौते, नवीकरणीय ऊर्जा कार्ययोजनाएं, मांग प्रबंधन उपाय, आपूर्ति लागत का विवरण, हानि अनुमान, कर्मचारी लागत, सब्सिडी का समायोजन और टाइम-ऑफ-डे टैरिफ लागू करने के प्रस्ताव शामिल हैं।
आयोग ने कहा कि सभी प्रस्तुतियों की जांच के बाद अंतिम टैरिफ आदेश पारित किए जाएंगे। साथ ही यह भी घोषणा की गई कि फरवरी–मार्च के दौरान चार जिलों—डीएचबीवीएन के लिए गुरुग्राम और हिसार तथा यूएचबीवीएन के लिए पानीपत और यमुनानगर—में अतिरिक्त सार्वजनिक सुनवाई आयोजित की जाएगी।



