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फरीदाबाद (अजय वर्मा), 2 फरवरी। फरीदाबाद के सिविल अस्पताल बादशाह खान में अस्पताल स्टाफ की लापरवाही के चलते जुगाड़ रिक्शा में लाश ले जाने के मामले के बाद फिर से बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। जहां अस्पताल स्टाफ की लापरवाही के चलते एक शव लगभग सवा घंटे तक एंबुलेंस में ही पड़ा रहा, क्योंकि उसे शव गृह में रखवाने के लिए कोई भी अस्पताल का कर्मचारी ड्यूटी पर मौजूद ही नहीं था। इससे साफ पता चलता है की बादशाह खान सिविल अस्पताल में मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाएं कितनी लचर हैं। बता दे की यह मात्र चार दिन में दूसरी बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। बादशाह खान सिविल अस्पताल में सड़क हादसे में मौत का शिकार हुए युवक का शव लगभग सवा घंटे तक एंबुलेंस में पड़ा रहा। शव को अस्पताल लेकर आने वाले पुलिसकर्मी प्रदीप कुमार ने बताया कि थाना भूपानी इलाके स्थित कावरा मोड के पास एक ऑटो और बाइक में भिड़ंत हो गई थी। जिसमें बाइक सवार पवन पुत्र घनश्याम उम्र 20 वर्ष की मौके पर ही मौत हो गई थी। जिसके शव को कब्जे में लेकर वह फरीदाबाद के बादशाह खान के अस्पताल पहुंचे और यहां पर कागजी कार्रवाई करने के बाद शव को मोर्चरी में रखवाने के लिए अस्पताल के स्टाफ का लगभग सवा घंटे तक इंतजार करते रहे, लेकिन ना तो डॉक्टर और न ही किसी अस्पताल के स्टाफ ने शव को रखवाने के लिए कोई स्टाफ या स्वीपर मुहैया कराया। पुलिसकर्मी के मुताबिक उन्हें डॉक्टर और स्टाफ ने बताया कि स्वीपर ड्यूटी पर नहीं है, जिसके चलते उन्हें लगभग सवा घंटे तक दूसरे स्पीपर के आने का इंतजार करना पड़ा। SPO प्रदीप कुमार के मुताबिक यदि अस्पताल में स्टाफ या कोई भी स्वास्थ्य कर्मी शव को समय से रखवा देता तो एंबुलेंस में शव सवा घंटे तक पड़ा नहीं रहता। गौरतलब है कि मात्र चार दिन में यह दूसरी बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है, जो बादशाह खान सिविल अस्पताल में मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं पर सवालिया निशान खड़े करता है।
वहीं इस मामले में मृतक पवन के दोस्त भी सवा घंटे तक अस्पताल में शव के पड़े रहने के बाद काफी गुस्से में नजर आए। निखिल, नरेंद्र और रोशन ने आरोप लगाया कि अस्पताल में ना तो डॉक्टर ने और ना ही किसी अस्पताल के स्टाफ ने आकर पवन को देखने की कोशिश की और ना ही किसी ने उसे मृत घोषित किया। वहीं उन्होंने बताया कि हादसे के समय भी पवन सड़क पर काफी देर तक पड़ रहा। लोग सड़क पर पड़े पवन को आते जाते देखते रहे, लेकिन समय रहते उसको किसी की मदद नहीं मिली। यदि उसे समय रहते मदद मिल जाती तो शायद पवन की जान बच सकती थी। वहीं, अस्पताल में भी एंबुलेंस में सवा घंटे तक पवन के सर से खून बहता रहा, लेकिन अस्पताल का कोई भी कर्मचारी शव को रखवाने के लिए नहीं पहुंचा। सवा घंटे इंतजार करने के बाद एक मोर्चरी का कर्मचारी पहुंचा तब जाकर पवन के शव को मोर्चरी में रखवाया गया। मृतक पवन के दोस्तों ने बताया कि पवन ने फरीदाबाद के नेहरू कॉलेज में हाल ही में प्रधान पद का चुनाव जीता था।
गौरतलब है कि लगभग 20 वर्षीय मृतक पवन तीन बहनों का एकलौता भाई था जो कि नेहरू कॉलेज में BA प्रथम वर्ष का छात्र था। जिसके पिता विदेश यानी दुबई में नौकरी करते हैं और माता गृहिणी हैं। इस घटना के सुनने के बाद ना केवल पवन के दोस्त अस्पताल पहुंच गए, बल्कि उनकी तीनों बहनें, माता और अन्य रिश्तेदार भी अस्पताल पहुंच गए जिनका रो रो कर बुरा हाल था और जैसे तैसे सभी को संभाला गया।



