आईईएस और आईटीएस अधिकारियों के लिए कॉर्पोरेट कानून और दिवाला संहिता प्रशिक्षण
कंपनी अधिनियम, प्रतिस्पर्धा कानून और दिवाला प्रक्रिया पर व्यावहारिक प्रशिक्षण
विशेषज्ञों ने नीतिगत संशोधन और वास्तविक मामलों की जानकारी साझा की
Bilkul Sateek News
गुरुग्राम,3 फरवरी- भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थान (आईआईसीए) द्वारा आईएमटी मानेसर परिसर में 02 से 06 फरवरी 2026 तक भारतीय आर्थिक सेवा (आईईएस) एवं भारतीय व्यापार सेवा (आईटीएस) के अधिकारियों के लिए कंपनी अधिनियम, प्रतिस्पर्धा कानून तथा दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता विषयों पर एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। एक सप्ताह तक चले इस गहन प्रशिक्षण में कुल 21 अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य अधिकारियों की कॉर्पोरेट नियामकीय ढांचे, नीति-निर्माण तथा सुशासन संबंधी समझ को और अधिक सुदृढ़ करना था।
संस्थान द्वारा तैयार इस प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में अधिकारियों की भूमिकाओं और दायित्वों को ध्यान में रखते हुए कंपनी अधिनियम, प्रतिस्पर्धा कानून, कॉर्पोरेट वित्त एवं दिवाला कानून जैसे विषयों पर व्यावहारिक और नीतिगत दृष्टिकोण प्रदान किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों को कॉर्पोरेट शासन से जुड़ी प्रक्रियाओं, नियामकीय तंत्र और वास्तविक मामलों की जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण के दौरान कंपनी प्रबंधन, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की शक्तियां व जांच प्रक्रिया, अर्थशास्त्र एवं विधि निर्माण, विकसित होते आर्थिक कानून के रूप में आईबीसी, नियामकीय शासन, प्रतिस्पर्धा-विरोधी समझौते, प्रभुत्व के दुरुपयोग, कॉर्पोरेट वित्त, ऋण एवं चूक, डेटा-आधारित निर्णय-निर्माण, विधायी आशय, कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया, राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण तथा राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण की भूमिका जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। साथ ही हालिया नीतिगत संशोधनों और नीति-निर्माण के व्यावहारिक अनुभव भी साझा किए गए।
संस्थान के आंतरिक एवं बाह्य विशेषज्ञों ने संसाधन व्यक्तियों के रूप में सहभागिता की, जिनमें सुधाकर शुक्ला (पूर्व सदस्य, आईबीबीआई एवं प्रमुख, सेंटर फॉर इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी, आईआईसीए), ज्ञानेश्वर कुमार सिंह (महानिदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, आईआईसीए), धनेंद्र कुमार (पूर्व अध्यक्ष, सीसीआई), जी.पी. मदान (संस्थापक, मदान लॉ ऑफिसेस), समीर गांधी , डॉ. एम.एस. साहू (पूर्व अध्यक्ष, आईबीबीआई), डॉ. ऑगस्टीन पीटर (पूर्व सदस्य, सीसीआई), डॉ. प्यला नारायण राव (एसोसिएट प्रोफेसर, स्कूल ऑफ कॉर्पोरेट लॉ एंड कॉम्पिटिशन लॉ, आईआईसीए), जी.आर. भाटिया (पार्टनर, लूथरा एंड लूथरा), डॉ. नवीन सिरोही (एसोसिएट प्रोफेसर, स्कूल ऑफ फाइनेंस एंड मैनेजमेंट, आईआईसीए), डॉ. देबज्योति राय चौधरी, डॉ. मुकुलिता विजयवर्गीय (पूर्व पूर्णकालिक सदस्य, आईबीबीआई), पूजा भार्य (इन्सॉल्वेंसी प्रोफेशनल), विक्रम कुमार (सीनियर पार्टनर, इनकॉर्प एडवाइजरी) तथा आलोक श्रीवास्तव (पूर्व विधि सचिव एवं पूर्व सदस्य, एनसीएलएटी) शामिल थे।
कार्यक्रम का शुभारंभ सुधाकर शुक्ला के स्वागत भाषण और पाठ्यक्रम अवलोकन से हुआ, जिसमें भारत में ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस के तीन महत्वपूर्ण स्तंभ—प्रवेश की स्वतंत्रता, संचालन की स्वतंत्रता और निर्गमन की स्वतंत्रता—पर प्रकाश डाला गया और इन्हें कंपनी अधिनियम, 2013; प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002; और दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता, 2016 से जोड़ा गया।
उद्घाटन सत्र का औपचारिक उद्घाटन आईआईसीए के महानिदेशक एवं सीईओ ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने किया, जिन्होंने भारत की आर्थिक व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में कॉर्पोरेट कानून, प्रतिस्पर्धा कानून और दिवाला ढांचे की बढ़ती महत्ता पर जोर दिया और अधिकारियों को कार्यक्रम के दौरान कॉर्पोरेट मामलों के विशिष्ट क्षेत्रों पर परियोजनाएं लेने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने केंद्रीय बजट 2026 की प्रमुख घोषणाओं—विशेषकर (एमएसएमई) के समर्थन और नई “कॉर्पोरेट मित्र” योजना का भी उल्लेख किया।
उद्घाटन सत्र में धनेंद्र कुमार का संबोधन विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा, जिसमें उन्होंने मोनोपोलिज़ एंड रिस्ट्रिक्टिव ट्रेड प्रैक्टिसेज (एमआरटीपी) अधिनियम से आधुनिक प्रतिस्पर्धा कानून तक की यात्रा और संस्थान-निर्माण पर अपने अनुभव साझा किए।
तकनीकी सत्रों में जी.पी. मदान ने कॉर्पोरेट कानून की मूलभूत अवधारणाओं, शासन संरचनाओं और निदेशकों की जिम्मेदारियों को व्यावहारिक उदाहरणों से स्पष्ट किया, जबकि समीर गांधी ने भारत में प्रतिस्पर्धा कानून के विकास पर गहन विचार साझा किए।
कार्यक्रम का समापन डॉ. प्यला नारायण राव द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस प्रकार, आईआईसीए ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से सिविल सेवकों के क्षमता निर्माण और व्यावसायिक विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित करते हुए भारत में सुदृढ़ कॉर्पोरेट गवर्नेंस और प्रभावी नीति-कार्यान्वयन को बढ़ावा दे रहा है।



