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पंचकूला, 25 जनवरी। पंचकूला की NIA विशेष अदालत ने गुरुग्राम क्लब धमाके में गैंगस्टर गोल्डी बराड़ के शूटर अंकित फौजी की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी के खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है। इसलिए अब वह डिफाल्ट बेल का कानूनी अधिकारी नहीं है।
गुरुग्राम के सेक्टर-29 स्थित क्लब मार्केट में 10 दिसंबर 2024 को बम धमाके हुआ था। धमाके के बाद पुलिस ने सचिन तालियान को दो देसी बम, पिस्टल और कारतूसों के साथ गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उसने खुद को कुख्यात गैंगस्टर और घोषित आतंकी गोल्डी बराड़ का गुर्गा बताया था।
जांच में यह स्पष्ट हुआ कि यह हमला क्लब मालिकों को धमकाने और गैंग के लिए उगाही और आतंक फैलाने के उद्देश्य से किया गया था। हरियाणा पुलिस की प्रारंभिक जांच के बाद मामला NIA को सौंप दिया गया था। जांच के दौरान अंकित कुमार उर्फ फौजी को भी इस साजिश में शामिल पाया गया और उसे 11 दिसंबर 2024 को गिरफ्तार किया गया। आरोपी पर यूएपीए, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और आर्म्स एक्ट समेत गंभीर धाराओं में केस दर्ज है।
अंकित कुमार ने अदालत में दलील दी कि 180 दिन की अवधि पूरी हो चुकी है और जांच अधूरी है, इसलिए उसे डिफाल्ट जमानत मिलनी चाहिए। हालांकि, NIA ने इस दलील का विरोध करते हुए कहा कि आरोपी के खिलाफ जांच पूरी कर 6 जून 2025 को चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। आगे की जांच केवल अन्य आरोपियों, जिनमें गैंगस्टर नेटवर्क से जुड़े फरार आरोपी रोहित गोदारा और रामदत्त शामिल हैं के खिलाफ चल रही है।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि एक बार आरोपी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो जाने के बाद डिफाल्ट जमानत का अधिकार समाप्त हो जाता है, भले ही अन्य आरोपियों के खिलाफ आगे की जांच जारी हो। अदालत ने माना कि यह मामला एक संगठित गैंगस्टर-आतंकी नेटवर्क से जुड़ा है, जिसका उद्देश्य धमाके कर लोगों में भय फैलाना और अवैध वसूली करना है।



