यमुना एक्शन प्लान व बंधवाड़ी में कचरा प्रबंधन की समीक्षा बैठक
हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन विनीत गर्ग की अध्यक्षता में हुई बैठक
सीवर कचरे की अवैध डंपिंग करने वाले टैंकर संचालकों पर चालान और एफआईआर के आदेश
लेग-1, लेग-2 और लेग-3 ड्रेनों की जल गुणवत्ता सुधार के लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत करने पर जोर
Bilkul Sateek News
गुरुग्राम, 14 जनवरी। हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन विनीत गर्ग ने मंगलवार को गुरुग्राम स्थित पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में यमुना एक्शन प्लान के अंतर्गत प्रदूषण नियंत्रण और राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) द्वारा कचरा प्रबंधन को लेकर दिए निर्देशों की अनुपालना में बंधवाड़ी लीगेसी कचरे के निस्तारण की प्रगति को लेकर संबंधित अधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बैठक में गुरुग्राम की बादशाहपुर की लेग एक, दो और तीन तथा झज्जर जिले की ड्रेन संख्या 8 एवं मुंगेशपुर ड्रेन को प्रदूषण से मुक्त करने के उद्देश्य से तैयार किए गए एक्शन प्लान की भी विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में फरीदाबाद के डिवीजनल कमिश्नर संजय जून, गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) के सीईओ पी.सी. मीणा, डीसी अजय कुमार, नगर निगम मानेसर के आयुक्त प्रदीप सिंह, हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव योगेश कुमार, एडीसी सोनू भट्ट सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
चेयरमैन विनीत गर्ग ने कहा कि ड्रेनों के टैपिंग, एसटीपी और सीईटीपी की स्थापना, कचरा प्रबंधन और निगरानी तंत्र को मजबूत करने से यमुना के जल की गुणवत्ता में निश्चित रूप से सुधार आएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं की नियमित समीक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि यमुना संरक्षण अभियान को ठोस और स्थायी परिणाम मिल सकें।
पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई
उन्होंने बताया कि गुरुग्राम के निगम क्षेत्र में कुछ टैंकर संचालक अवैध रूप से सीवर का कचरा खुले स्थानों और नालों में डाल रहे हैं। यह न केवल पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि प्रदूषण नियंत्रण कानूनों का खुला उल्लंघन भी है। इस स्थिति पर कड़ा रुख अपनाते हुए उन्होंने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई न बरती जाए। दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए, मौके पर ही चालान काटे जाएं और गंभीर मामलों में एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि नियमित निगरानी बढ़ाई जाए, संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष नजर रखी जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।
इन विषयों से संबंधित कार्यों की प्रगति के बारे हुए व्यापक विचार विमर्श
बैठक में यमुना की स्वच्छता, सीवर प्रबंधन, अवैध डंपिंग, एसटीपी के संचालन तथा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा की गई। बहादुरगढ़ और रोहतक क्षेत्र से ड्रेन नंबर-8 में प्रवेश करने वाले 153.7 एमएलडी, लेग-I ड्रेन में 55.4 एमएलडी तथा लेग-II ड्रेन में 78 एमएलडी अपशिष्ट जल को टैप करने से संबंधित कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की गई। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए कि सभी कार्य तय समय-सीमा में पूरे किए जाएं। ड्रेन नंबर-8 के अंतर्गत झज्जर जिके के याकूबपुर गांव स्थित आउटफॉल चैनल, उद्योग विहार क्षेत्र से निकलने वाले अपशिष्ट जल तथा बॉक्स ड्रेन के अंदर से आने वाले स्रोतों पर विशेष रूप से चर्चा की गई।
बैठक में गुरुग्राम की लेग एक, दो व तीन ड्रेन की स्थिति की भी समीक्षा
बैठक में लेग-I, लेग दो व लेग तीन ड्रेनो की स्थिति की भी समीक्षा की गई। सम्बंधित अधिकारियों ने चेयरमैन को जानकारी देते हुए बताया कि इस ड्रेन के माध्यम से गुरुग्राम क्षेत्र का अपशिष्ट जल लेकर नजफगढ़ ड्रेन के माध्यम से दिल्ली क्षेत्र में यमुना नदी में मिलता है। वर्तमान में इसमें 55.4 एमएलडी अनुपचारित अपशिष्ट जल प्रवाहित हो रहा है। इसके उपचार के लिए विभिन्न स्थानों पर एसटीपी स्थापित करने की प्रक्रिया प्रगति पर है। साथ ही औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट जल के नियंत्रण को लेकर भी ठोस रणनीति पर कार्य किया जा रहा है।
इसके साथ ही लेग-2 ड्रेन गुरुग्राम क्षेत्र से निकलने वाले अपशिष्ट जल को लेकर दिल्ली क्षेत्र में नजफगढ़ ड्रेन के माध्यम से वज़ीराबाद बैराज के नीचे यमुना नदी में मिलती है। इस ड्रेन के माध्यम से वर्तमान में 8 एमएलडी उपचारित जल प्रवाह हो रहा है। साथ ही घरेलू अपशिष्ट जल के उपचार के लिए 20 एमएलडी क्षमता का एक एसटीपी पहले से स्थापित किया जा चुका है। इसके अलावा धनवापुर में 100 एमएलडी क्षमता का नया एसटीपी स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। लेग-2 ड्रेन में कुल 17 अपशिष्ट जल निकासी बिंदुओं की पहचान की गई है, जिन पर चरणबद्ध तरीके से कार्य योजना बनाई जा रही है।
लेग-तीन ड्रेन में वर्तमान में बड़ी मात्रा में शोधन कार्य किया जा रहा है। गुरुग्राम क्षेत्र के घरेलू अपशिष्ट जल के उपचार के लिए 420 एमएलडी क्षमता के 12 एसटीपी पहले से कार्यरत हैं, जबकि 27 एमएलडी क्षमता के दो नए एसटीपी निर्माणाधीन हैं, इसके अलावा धनवापुर में 240 एमएलडी क्षमता के तीन नए एसटीपी स्थापित करने का प्रस्ताव है और 100 एमएलडी क्षमता के एक एसटीपी का सुधार किया जा रहा है। औद्योगिक अपशिष्ट जल के उपचार के लिए 55.2 एमएलडी क्षमता के दो सीईटीपी पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं तथा 30.5 एमएलडी क्षमता के तीन और सीईटीपी प्रस्तावित हैं। प्रदूषण नियंत्रण को और मजबूत करने के लिए पहले चिन्हित 11 अपशिष्ट जल निकास बिंदुओं को वर्ष 2026 तक टैप करने की योजना है, वहीं अतिरिक्त निकास बिंदुओं की पहचान भी की गई है। इन सभी प्रयासों से लेग-III ड्रेन के जल की गुणवत्ता में निरंतर सुधार की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं और यमुना नदी को स्वच्छ बनाने की दिशा में सकारात्मक प्रगति हो रही है।
उन्होंने बैठक में धार्मिक गतिविधियों से उत्पन्न होने वाले अपशिष्ट के प्रबंधन पर भी विशेष ध्यान दिया। अधिकारियों ने बताया गया कि हवन सामग्री, फूल, कपड़े, नारियल आदि को नदी में प्रवाहित होने से रोकने के लिए घाटों का निर्माण और विशेष प्रणालियों की स्थापना की जा रही है, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ धार्मिक भावनाओं का भी सम्मान बना रहे।
वेस्ट मैनेजमेंट की नियमित की जाए समीक्षा
उन्होंने बैठक में राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) द्वारा वेस्ट मैनेजमेंट को लेकर जारी निर्देशों की प्रगति के बारे में भी संबंधित अधिकारियों से जानकारी ली। एनजीटी के निर्देशों बंधवाड़ी कचरा निस्तारण स्थल पर लीगेसी कचरे तथा प्रतिदिन उत्पन्न हो रहे ठोस कचरे के प्रबंधन को लेकर आवश्यक दिशानिर्देश भी दिए। उन्होंने बैठक के दौरान लीचेट ट्रीटमेंट हेतु डीटीआरओ की स्थापना को प्राथमिकता देते हुए इसके शीघ्र क्रियान्वयन पर बल दिया। साथ ही लीगेसी कचरे के निस्तारण से संबंधित कार्य आवंटन प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने तथा एजेंसी चयन को समयबद्ध तरीके से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने घर-घर कचरा संग्रहण और स्रोत पर कचरा पृथक्करण को प्रभावी रूप से लागू करने पर जोर देते हुए कहा कि इससे कचरे का वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन सुनिश्चित होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सभी निर्देशों के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा की जाएगी ताकि निर्धारित लक्ष्यों को समय पर प्राप्त किया जा सके।
बैठक में हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी सिद्धार्थ भार्गव एवं आकांक्षा तंवर, एसीपी सुशीला, एसीपी सत्यपाल यादव, जीएमडीए से कार्यकारी अभियंता विक्रम सिंह, एमसी बहादुरगढ़ से एमई जोगिंदर सिंधु सहित एनसीआर के विभिन्न जिलों के अधिकारी उपस्थित थे।



