गुरुग्राम, 10 फरवरी 2026।
हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (एचईआरसी) के अध्यक्ष श्री नन्द लाल शर्मा ने कहा है कि प्रदेश की बिजली वितरण प्रणाली को सशक्त, मजबूत और आधुनिक बनाना समय की आवश्यकता है। यदि वितरण कंपनियाँ दक्षता में सुधार नहीं करेंगी, तो भविष्य में वे निजी क्षेत्र की बिजली कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम नहीं रह पाएंगी। उन्होंने कहा कि एग्रीगेट टेक्निकल एंड कमर्शियल (एटीएंडसी) लॉस को कम करना और उपभोक्ता संतुष्टि सूचकांक को लगातार बेहतर बनाना वितरण निगमों की प्राथमिकता होनी चाहिए।

एचईआरसी अध्यक्ष मंगलवार को दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) द्वारा वित्त वर्ष 2026–27 के लिए दायर की गई वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) याचिका पर गुरुग्राम में आयोजित जनसुनवाई की अध्यक्षता कर रहे थे। इस दौरान आयोग के सदस्य श्री मुकेश गर्ग और श्री शिव कुमार भी मौजूद रहे। जनसुनवाई में आयोग एवं बिजली वितरण निगमों के वरिष्ठ अधिकारी, औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधि और उपभोक्ता शामिल हुए।
श्री नन्द लाल शर्मा ने कहा कि जिस प्रकार दूरसंचार क्षेत्र में उपभोक्ताओं को सेवा प्रदाता चुनने की आज़ादी है, उसी तरह भविष्य में बिजली उपभोक्ताओं को भी विकल्प उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए वितरण व्यवस्था को तकनीकी रूप से मजबूत बनाना अनिवार्य है।
डीएचबीवीएन और उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएन) ने अपनी एआरआर याचिकाओं में बताया कि वित्त वर्ष 2026–27 के लिए दोनों निगमों को कुल 51,156.71 करोड़ रुपये के राजस्व की आवश्यकता है, जबकि मौजूदा बिजली दरों के आधार पर 52,761.87 करोड़ रुपये के राजस्व का अनुमान है। इस प्रकार 1,605.16 करोड़ रुपये का अधिशेष दर्शाया गया है। हालांकि, वित्त वर्ष 2024–25 के पूर्व घाटे को समायोजित करने के बाद 4,484.71 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा सामने आता है।
डीएचबीवीएन के प्रबंध निदेशक श्री विक्रम सिंह ने बताया कि निगम के पास वर्तमान में 45.12 लाख उपभोक्ता हैं और एटीएंडसी लॉस 11.67 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि निगम उपभोक्ता सेवाओं में सुधार और लाइन लॉस कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।
एचईआरसी अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि आयोग का उद्देश्य उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करते हुए वितरण कंपनियों की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करना है। आयोग यह भी सुनिश्चित करता है कि अनावश्यक खर्च का बोझ उपभोक्ताओं पर न पड़े। उन्होंने बिजली खरीद में दीर्घकालिक और लचीली रणनीति अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि दूरदराज़ क्षेत्रों के उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आयोग स्वयं फील्ड में जाकर जनसुनवाई कर रहा है। इससे निर्णय लेने से पहले जमीनी हकीकत को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा।
गौरतलब है कि आयोग 24 फरवरी को पानीपत, 25 फरवरी को हिसार और 2 मार्च को यमुनानगर में भी एआरआर याचिकाओं पर जनसुनवाई आयोजित करेगा।



